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इस गांव में नहीं चलता है भारत का कोई भी कानून, जानें क्या है राज

Tue, 05 Jun 2018 08:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत एक ऐसा देश है जो रहस्यों से भरा हुआ है। ऐसे रहस्य जिनके पीछे का राज आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है। माना कि आजकल ऋषि-मुनियों और अवतारों की इस भूमि में लोग धर्म से अधर्म की राह पर चल पड़े हैं। लेकिन अपनी अनोखी खासियतों से ये देश आज भी अछूता नहीं है। आज हम आपको भारत के कुछ ऐसे गांवों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके रहस्यों को जानकर आप हैरान रह जाएंगे।
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मलाणा गांव- यहां कोई भारतीय कानून नहीं चलता

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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के दुर्गम इलाके में स्थित यह गांव अपनी कई गतिविधियों को लेकर चर्चा का विषय बना रहता है। इस गांव में कोई भी भारतीय कानून नहीं चलता, गांव के अपने नियम हैं। इस गांव की खुद की संसद है जो सारे फैसले लेती है। 
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दीवार छूना है बैन

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मलाणा गांव की एक अनोखी बात यह भी है कि इस गांव में दीवार ना छूने का भी एक नियम है। जी हां, ये सुनकर आपको थोड़ा अजीब जरूर लगेगा लेकिन ये सच है। इस गांव की दीवारों को कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं छू सकता है। यदि वह ऐसा करता है तो उसे जुर्माने के तौर पर 1000 रुपये देने पड़ सकते हैं। 

टूरिस्ट रहते हैं टेंट में

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इस गांव में आने वाले पर्यटकों को गांव से बाहर ही टेंट लगाकर रुकना पड़ता है। उन्हें गांव के अंदर ठहरने की इजाजद भी नहीं होती। इसके अलावा यदि पर्यटक किसी दुकान से कोई सामान खरीदना चाहते हैं तो उन्हें दुकान से बाहर खड़े होकर ही सामान खरीदना पड़ता है ताकि गलती से वह गांव की दीवार ना छू लें।
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शनि शिंगणापुर- घरों और दुकानों में नहीं हैं दरवाजे

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पूरी दुनिया ताला चाबी का इस्तेमाल ही इसलिए करती है ताकि उसके सामान की चोरी ना हो सके। घरों और दुकानों पर भी दरवाजे लगे होते हैं और उन दरवाजों पर ताले। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि चोर उन तालों को भी तोड़ देते हैं लेकिन इस गांव में ऐसा बिल्कुल नहीं है।
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घरों में नहीं हैं दरवाजे

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महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा तालुके में शनि शिंगणापुर भारत का इकलौता ऐसा गांव है जहां किसी भी घर और दुकान में ताला तो दूर की बात दरवाजा तक नहीं है। यहां के लोगों की ये मान्यता है कि उनके सामान की रक्षा स्वंय भगवान शनिदेव करते हैं। 
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मुत्तुर गांव- संस्कृत ही है गांव की भाषा

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भारत देश की पहचान रही संस्कृत भाषा को आज बहुत कम लोग ही जानते हैं। हालात तो ऐसे हैं कि हम अपनी मातृभाषा हिंदी को बचाने में भी संघर्ष कर रहे हैं। कई बार तो ऐसा भी होता है कि यदि कोई व्यक्ति भारत का निवासी होते हुए भी अच्छी अंग्रेजी बोलता है और टूटी फूटी हिंदी बोलता है तो ऐसे लोगों को पढ़े लिखे होने का तमगा दे दिया जाता है।

सब बोलते हैं अंग्रेजी

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वहीं वह व्यक्ति जो हिंदी तो अच्छी बोल लेता है पर अंग्रेजी में थोड़ा कच्चा होता है तो ऐसे व्यक्ति को लोग अनपढ़ तक कहने से पीछे नहीं हटते। कर्नाटक के शिमोगा शहर से करीब 10 किमी की दूरी पर स्थित इस गांव में लोग आज भी संस्कृत में ही बातचीत करते हैं। इस गांव की भाषा संस्कृत है जो प्राचीनकाल से चली आ रही है। यहां बच्चों को प्राथमिक शिक्षा भी संस्कृत में ही दी जाती है।

कोडिन्हा गांव- जुड़वां लोगों का गांव

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इस गांव की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां 350 से ज्यादा जुड़वां जोड़े रहते हैं। यह गांव केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित है। इसे जुड़वां का गांव या ट्विन्स विलेज भी कहा जाता है। 

1000 में होते हैं 45 जुड़वां

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वैश्विक स्तर पर यदि देखा जाए तो 1000 बच्चों में 4 जुड़वां होते हैं। लेकिन इस गांव में 1000 बच्चों पर 45 जुड़वां होते हैं। यदि आप यहां आएंगे तो आपको बहुत से जुड़वां जोड़े मिल जाएंगे लेकिन इस रहस्य के पीछे का क्या राज है ये आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है।
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कुलधरा गांव- भूतों का डेरा

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जैसलमेर जिले का कुलधरा गांव पिछले करीब 70 सालों से वीरान पड़ा है। इस गांव में कोई नहीं रहता और लोग भी यहां रात को आने से डरते हैं। कहा जाता है कि यहां पालीवाल ब्राह्मणों की आवाजें सुनाई देती हैं। जब इस गांव में कोई नहीं होता तब भी यहां चहल पहल रहती है। भूतिया होने के बाद भी यह गांव एक टूरिस्ट स्पॉट है।
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