पिछले 5 दिनों के भीतर गोरखपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में 63 बच्चों की सांसें थम चुकी हैं। गंभीर हो चुके इस मामले की वजह से विपक्ष सरकार के निशाने पर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस हादसे की वजह से सीएम योगी का इस्तीफा तक मांग चुके हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने की वजह से बच्चों की मौत हुई है। वहीं डॉक्टर्स इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं।
ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी है कि आखिर ये पूरा मामला है क्या? क्यों अचानक अस्पताल में इतने बच्चों को भर्ती कराया गया? असल में ऑक्सीजन न मिलने की वजह से जिन बीमार बच्चों की मौत हुई उन्हें इंसेफिलाइटिस नाम की बीमारी की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह वही बीमारी है जिसने पिछले दो दशक से गोरखपुर और पूर्वाचंल में हाहाकार मचा रखा है। सुनने में बेशक हैरतभरा लगे लेकिन हकीकत ये ही है कि दो दशक में 30 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत इस बीमारी के कारण हो चुकी है। अैर इससे भी बड़ी हैरत ये है कि तमाम सरकारें इस बीमारी के सामने हाथ खड़े कर चुकी हैं नतीजतन इस पर आज तक काबू नहीं पाया जा सका।
क्या है इंसेफिलाइटिस के लक्षण
इंसेफिलाइटिस नाम की इस बीमारी के फैलने के बाद शरीर पर कई तरह के इंफेक्शन सामने आने लगते हैं। इंसेफिलाइटिस, क्यूलेक्स मच्छर के काटने की वजह से होता है। इस बीमारी को 'तेज दिमागी बुखार' भी कहते हैं। मेडिकल न्यूज टुडे वेबसाइट के मुताबिक ये तेजी से बढ़ने वाली बीमारी है, जिसमें मरीज के लिए तुरंत स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत होती है।
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इस बीमारी की चपेट में सभी उम्र के लोग चपेट में आ सकते हैं, लेकिन इस बीमारी की फैलने की सबसे ज्यादा संभावना बच्चों में होती है। वायरल इंफेक्शन की वजह से ये बीमारी बढ़ती है। कभी-कभी इस बीमारी के बढ़ने की वजह ये होती है कि खुद दिमाग का एम्यून सिस्टम दिमागी टिशूज पर हमला करने लगते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मामलों में बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से भी ये बीमारी होती है। ये छुआछूत से फैलने वाली बीमारी नहीं है।
क्या है जापानी इंसेफिलाइटिस
एशिया में इंसेफिलाइटिस की इस बीमारी का मुख्य प्रकार जापानी इंसेफिलाइटिस है। जो कि मच्छर से फैलने वाला वायरस है। क्यूलेक्स मच्छर से फैलने वाली इस बीमारी का वायरस डेंगू के मच्छर जैसा ही होता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक जेईवी प्राथमिक तौर पर बच्चों में फैलता है।