अपने बिंदास अंदाज को लेकर चर्चा में रहने वाली बिहार से कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन एक बार फिर चर्चाओं में हैं। जिसकी वजह है उनका वो प्राइवेट बिल जिसे वो जल्द ही संसद में पेश करने वाली हैं।
बिल में इस बात की मांग की गई है कि शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची को रोकने के लिए सरकार एक व्यवस्था तय करे, जिससे कोई पांच लाख रुपये से ज्यादा खर्च न कर सके। एक तरफ जहां रंजीत रंजन की इस पहल की सराहना की जा रही है वहीं खुद उनकी शादी को लेकर ऐसा खुलासा हुआ है कि सुनकर हर कोई हैरत में पड़ गया है।
बिहार के दबंग सांसद पप्पू यादव से प्रेम विवाह करने वाली रंजीत रंजन की शाही शादी में एक लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे और मेहमानों के ठहरने की व्यवस्था के लिए 200 एकड़ क्षेत्र में पंडाल लगाया गया था।
शादी में एक लाख से ज्यादा लोग हुए थे शामिल
उस शादी में शामिल हुए एक चश्मदीद ने एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान बताया कि ये शादी 6 फरवरी 1994 को पूर्णिया में हुई थी। जिसमें एक लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। उस दिन शहर का आलम ऐसा था कि हर चौक चौराहे को भव्य तरीके से सजाया गया था।
शहर का कोई होटल ऐसा नहीं था जिसमें मेहमानों के रुकने की व्यवस्था न की गई हो। उस दिन जिससे पूछो वो ही कहता कि मुझे भी शादी का निमंत्रण है, ऐसा लगता था जैसे पूरा शहर ही उस आयोजन में आमंत्रित हो।
इस शादी में उस दौर के बड़े नेता मुलायम सिंह यादव, चौधरी देवी लाल, डीपी यादव और राजबब्बर सहित कई बड़ी फिल्मी हस्तियां भी पहुंची थीं। आलम ये था कि शाम होते होते पूरा शहर गाड़ियों से भर गया था। पूर्णिया कालेज और आसपास के मैदानों के लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में शादी के कार्यक्रम की व्यवस्था की गई थी।
बताते हैं कि रंजीत रंजन के पिता पटना के गुरुद्वारे में ग्रंथी थे और वो और उनका छोटा भाई उन्हीं के साथ रहा करते थे, बाकी परिवार जालंधर में रहता था। खास बात ये थी कि शादी के दिन रंजीत रंजन का पूरा परिवार जालंधर से एक चार्टेड प्लेन में सवार होकर पटना आया था, दुल्हन बनी रंजन भी उसी में थीं।
रंजीत रंजन का दावा हमारी नहीं लड़के वालों की थी व्यवस्था
कहा जाता है कि अपनी इस शादी में सांसद पप्पू यादव कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते थे। उस दौर में उनका जलवा ऐसा था कि निर्दलीय विधायक बनने के बाद वह अकेले अपने दम पर ही लोकसभा पहुंच गए थे। क्षेत्र में उनकी जबरदस्त लोकप्रियता थी। ऐसे में उनकी शादी को लेकर हर किसी के बीच उत्सुकता का माहौल था।
वहीं इस पर रंजीत रंजन कहती हैं कि ये सारी व्यवस्था लड़के वालों की ओर से की गई थी हमनें इसमें कुछ खर्च नहीं किया था। हां ये बात सही है कि हम चार्टेड प्लेन से वहां पहुंचे थे लेकिन वह भी उन्हीं ने भिजवाया था।
हकीकत तो ये है मेरे परिवार वालों को तो वहां भोजन तक नहीं मिल सका था। मैं तो आज तक उन्हें इस बात का उलाहना देती हूं। हमने ये भी तय किया है कि अपने बच्चों की शादी भी बिना दान दहेज के करेंगे। आखिर दहेज के लिए किसी पिता को क्यों मजबूर किया जाए।