1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व वायुसेना प्रमुख अर्जन सिंह का निधन हो गया है। शनिवार सुबह उन्हें आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 98 वर्षीय सिंह पांच स्टार पाने वाले भारतीय वायुसेना के एकमात्र अधिकारी थे।
जन्म: 15 अप्रैल 1919 को लायलपुर (फैसलाबाद) अब पाकिस्तान में हुआ था। उनके पिता एक डिवीजन कमांडर के एडीसी के रूप में सेवा प्रदान करते थे। उनके दादा रिसालदार मेजर हुकम सिंह 1883-1917 के बीच कैवलरी से संबंधित थे।
शिक्षा : उन्होंने शिक्षा मोंटगोमरी (अभी साहिवाल, पाकिस्तान) में पूरी की।
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सैन्य सेवा :
1938 में आरएएफ कॉलेज क्रेनवेल में फ्लाइट कैडेट के रूप में चयनित हुए। (19 साल की उम्र में)
23 दिसंबर 1939 को रॉयल एयरफोर्स में पायलट ऑफिसर के तौर पर कमीशन मिला।
9 मई 1941 को फ्लाइंग ऑफिसर बनाए गए।
15 मई 1942 को फ्लाइट लेफ्टिनेंट तथा 1944 में स्क्वॉड्रन लीडर (एक्टिंग) बने।
2 जून 1944 को प्रतिष्ठित उड़ान (डीएफसी) सम्मान
1947 में विंग कमांडर, रॉयल इंडियन एयर फोर्स, एयर फोर्स स्टेशन, अंबाला बनाए गए।
1948 में ग्रुप कैप्टन, डॉयरेक्टर, ट्रेनिंग हेडक्वार्टर्स बनाए गए।
1949-1952 में (एक्टिंग) एयर कॉमोडोर, इंडियन एयर फोर्स, (एओसी) ऑपरेशनल कमांड बनाए गए।
2 जनवरी 1955 को एयर कॉमोडोर (एओसी) वेस्टर्न एयर कमांडए दिल्ली बनाए गए।
19 दिसंबर 1959 को एयर वाइस मार्शल बने।
1961 में एयर वाइस मार्शल, एयर ऑफिसर इंचार्ज ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, मुख्यालय
1963 में उन्हें वायुसेना उप-प्रमुख बनाया गया।
1 अगस्त 1964 को चीफ ऑफ एयर स्टाफ (एयर मार्शल) बनाए गए।
26 जनवरी 1966 को चीफ ऑफ स्टॉफ कमेटी नियुक्त किए गए।
अगस्त 1969 को भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए।
26 जनवरी 2002 को मार्शल ऑफ द इंडियन एयर फोर्स (फील्ड मार्शल) यानि पांच सितारा सैन्य अधिकारी बनाए गए।
अर्जन सिंह सेना के 5 स्टार रैंक अधिकारी थे
Arjan singh
खास :
- अर्जन सिंह सेना के 5 स्टार रैंक अधिकारी थें। उन्हें साल 2002 में फील्ड मार्शल के बराबर फाइव स्टार रैंक देकर प्रमोशन दिया गया था। देश में पांच स्टार वाले तीन सैन्य अधिकारी रहे हैं, इनमें फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और फील्ड मार्शल के एम करियप्पा का नाम है। ये दोनों जीवित नहीं हैं।
- 15 अगस्त 1947 (आजादी के दिन) को उन्होंने वायुसेना के 100 से भी अधिक विमानों के साथ लाल किले के ऊपर से फ्लाइटपास्ट का नेतृत्व किया था।
- 1962 में हुए चीन के साथ युद्घ के बाद 1963 में उन्हें वायुसेना उप-प्रमुख बनाया गया था। आजादी के बाद पहली बार लड़ाई में उतरी भारतीय वायुसेना की कमान उन्हीं के ही हाथ में थी।
- एक अगस्त 1964 को जब वायु सेना अपने आप को नई चुनौतियों के लिए तैयार कर रही थी, उस समय एयर मार्शल के रूप में अर्जन सिंह को इसकी कमान सौंपी गई थी। जब उन्हें वायुसेना प्रमुख बनाया गया तो उनकी उम्र उस वक्त महज 44 साल थी। वह 1 अगस्त 1964 से 15 जुलाई 1969 तक वायु सेनाध्यक्ष रहे।
- 1965 के युद्ध में वायुसेना में अपने योगदान के लिए उन्हें वायु सेनाध्यक्ष के पद से पद्दोन्नत होकर एयर चीफ मार्शल बनाया गया। वे भारतीय वायुसेना के पहले एयर चीफ मार्शल थे।
सेवानिवृत्ति के बाद :-
- 1971 में उन्हें स्विट्जरलैंड में भारतीय राजदूत नियुक्त किया गया। इसके अलावा वह कीनिया (1974) के भी राजदूत रहे हैं। 1989-90 में वे दिल्ली के उपराज्यपाल भी रह चुके हैं।
सम्मान : -
पद्म विभूषण, जनरल सर्विस मेडल 1947, समर सेवा स्टार, रक्षा मेडल, सैन्य सेवा मेडल, इंडियन इंडिपेनडेंस मेडल, डीएफसी, 1939-1945 स्टार, बर्मा स्टार, वार मेडल 1939-1945, इंडिया सर्विस मेडल आदि।
14 अप्रैल, 2016 को मार्शल अर्जन सिंह के 97वें जन्मदिन से एक दिन पहले तत्कालीन वायुसेना प्रमुख अरूप राहा ने पश्चिम बंगाल में स्थित पानागढ़ एयर फोर्स बेस का नाम अर्जन सिंह के नाम पर किया था। तब से इसे एयर फोर्स स्टेशन अर्जन सिंह कहा जाता है।
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