मोदी सरकार ने आम चुनाव से ठीक पहले बड़ा फैसला लेते हुए सामान्य वर्ग के लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण देने का एलान किया है। फैसले के अनुसार सालाना आठ लाख रुपए से कम आय वाले सवर्णों को भी 10 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके लिए कई तरह की शर्तें निर्धारित की गई हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देना है।
देश में पहले से 49.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है जिसके तहत एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण मिलता है। हालांकि, लंबे समय से जाट, गुज्जर, राजपूत, मराठा सहित कई जातियों की ओर से आरक्षण की मांग उठती रही है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से 50 फीसदी आरक्षण का दायरा तय कर देने से इनकी मांग को परवान नहीं चढ़ाया जा सकता है। लेकिन सरकार के फैसले से सवर्ण वर्ग को भी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
वर्तमान में यह है आरक्षण की स्थिति
अनुसूचित जाति (SC) 15 %
अनुसूचित जनजाति (ST) 7.5 %
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) 27 %
कुल आरक्षण 49.5 %
आरक्षण देने का उद्देश्य काफी पहले से स्पष्ट रहा है, लेकिन समय-समय पर आरक्षण नीति में संशोधन किये गए हैं। आरक्षण का मूल उद्देश्य केंद्र और राज्य में शिक्षा के क्षेत्र, सरकारी नौकरियों, चुनाव और कल्याणकारी योजनाओं में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।