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राजनीति के चाणक्य एम करुणानिधि की जिंदगी और परिवार के कुछ दिलचस्प किस्से

Tue, 07 Aug 2018 07:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
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डॉ. एम करुणानिधि का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया। 94 साल के करुणानिधि को लोग प्यार से कालांगिनर भी कहा करते थे। उनकी दक्षिण की राजनीति में जितनी पैठ थी उतनी ही पैठ केंद्र की सरकारों में भी रही थी। वह भारतीय राजनीति के चाणक्य भी कहे जाते थे। राजनीति के परे उनकी एक पारिवारिक जिंदगी भी थी। 
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आइए जानते हैं पारिवारिक जिंदगी में कैसे थे करुणानिधि,  उनकी तीन शादियों और प्यार के अफसानों के बारे में 

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के मुखिया और पांच बार मुख्यमंत्री रहे। आज जब उन्होंने कावेरी अस्पताल में आखिरी सांस ली तब न केवल उनकी दोनों पत्नियां, बल्कि बच्चे और चाहने वाले साथ खड़े थे। उनकी सलामती की दुआएं मांगी जा रही थी, वहीं डॉक्टर दिन रात जुटे हुए थे उनकी जान बचाने में, लगातार दुआओं का दौर चल रहा था। 

करुणानिधि की जिंदगी में झांकें तो लगता है कि हीरो की कहानी लिखते-लिखते वह खुद दक्षिण के हीरो बन गए। उनकी करिश्माई छवि की वजह से ही उनकी पार्टी न केवल सत्ता में आई, बल्कि करुणानिधि 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और 13 बार विधायक बने। वे कभी चुनाव नहीं हारे।
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करुणानिधि की जिंदगी और शादियां

करुणानिधि की निजी जिंदगी भी काफी दिलचस्प रही है। उनकी तीन बीवियां हैं- पद्मावती, दयालु अम्मल और रजती अम्मल। पद्मावती की मौत हो चुकी है। दयालु अम्मा और रजती उनके साथ ही रहती रहीं। एक पत्नी के रूप में तो दूसरी प्रेमिका के रूप में। सन् 1944 के आसपास करुणानिधि की मुलाकात पद्मावती अम्माय्यर से हुई। वह दक्षिण सिनेमा के प्लेबैक सिंगर सीएस जयरामन की बहन थी। छरहरी लंबी और आकर्षक नैन नक्श वाली पद्मावती अम्माय्यर पसंद आ गई। मुलाकातों का दौर प्यार में बदला और 1946 में दोनों ने शादी की ली। 1948 में बीमारी के चलते पद्मावती का निधन हो गया।पद्मावती के निधन के चार साल बाद 1952 में उन्होंने दयालु अम्मल से शादी की ली। 
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एम के स्टालिन करुणानिधि के उत्तराधिकारी

करुणानिधि और पत्नी दयालु से चार बच्चे -तीन बेटे और एक बेटी हैं। इनके नाम हैं- एमके अझागिरी, एमके स्टालिन, एकके थामिलारासु और सेल्वी। एम के स्टालिन ही करुणानिधि के उत्तराधिकारी के तौर पर डीएमके की बागडोर संभाले हुए हैं।

60 के दशक में चुनाव प्रचार के दौरान करुणानिधि की मुलाकात कवि कन्नडासन के डांस ग्रुप की सदस्य रजती से हुई। करुणानिधि रजती की ओर आकर्षित होते चले गए और फिर मुलाकातें होने लगीं। जल्दी ही मुलाकातों का दौर प्यार में बदल गया। उस समय रजती मुश्किल से 20-21 साल की थीं और करुणानिधि उनसे 21 साल बड़े थे।
उन दिनों डीएमके का ‘स्वयं मर्यादा कल्याणम्’ नाम से एक कार्यक्रम चल रहा था। इसके अनुसार, लड़का और लड़की शादी के लिए न तो कोर्ट जाते थे और न ही किसी मंत्रोच्चार से विवाह करते थे। इसके लिए उन्होंने रास्ता निकाला था कि युवक और युवती पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच जिंदगी भर साथ निभाने की कसम खाएंगे।

करुणानिधि ने भी इसी रास्ते पर चलते हुए रजती के साथ पार्टी नेताओं से आशीर्वाद ले लिया। इसके बाद से दयालु जहां करुणानिधि की पत्नी रहीं, वहीं रजती को संगिनी कहा जाने लगा। एक साल बाद ही 1968 में कनिमोझी का जन्म हो गया। कानूनी तौर पर दयालु को ही उनकी पत्नी होने का हक हासिल है लेकिन दुनिया यही जानती है कि दोनों उनकी पत्नियां हैं।
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