केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को उम्मीद जताई कि किसान संगठनों से शुक्रवार को होने वाली वार्ता में विवाद का समाधान निकल जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि आंदोलनकारी किसान संघ भी किसानों की भलाई सोचेंगे और समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
बता दें, बीते करीब 40 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर सैकड़ों किसान केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। सरकार के साथ उनकी अब तक सात दौर की वार्ता हो चुकी है, जिसमें किसान संगठनों की आधी मांगें मान ली गई हैं, जबकि तीनों कानूनों को वापस लेने व एमएसपी की गारंटी का कानून बनाने की मांग पर गतिरोध कायम है। इस मामले में सरकार व संयुक्त किसान मोर्चा अपने-अपने दावों पर अडिग हैं।
8 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चे व सरकार के बीच आठवें दौर की वार्ता होगी। इसे देखते हुए कृषि मंत्री तोमर ने समाधान की उम्मीद जताई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हम किसानों की भलाई के लिए वचनबद्ध हैं। हम उन लोगों से भी मिलेंगे जो इन कानूनों का समर्थन कर रहे हैं और उनसे भी मिलेंगे जो इनका विरोध कर रहे हैं। उम्मीद करता हूं कि इन कानूनों का विरोध कर रहे संगठन किसानों की भलाई के बारे में सोचेंगे और समाधान निकालने में सक्रिय रहेंगे।
ब्रिटिश पीएम का दौरा रद्द होना हमारी जीत, सरकार की हार: किसान संगठन
कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने कहा है कि ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन का दौर रद्द होना उनकी ‘राजनीतिक जीत’ और सरकार की ‘कूटनीतिक हार’ है। दरअसल, गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित जॉनसन ने अपने देश में कोराना के बढ़ते प्रसार के चलते दौरा टाल दिया है। जबकि संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा, दौरा रद्द होना हमारी जीत है। इससे साबित होता है कि हमारी मांगों और आंदोलन को वैश्विक समर्थन मिल रहा है। इस आंदोलन में अब तक 80 किसान जान गवां चुके हैं। यह जन आंदोलन बन रहा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार वार्ता और हमारी समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है।