ठगों को काबू में रखना मुश्किल होता जा रहा है। अभी तक भारत में आईबी, सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाएं इन ठगों से परेशान थीं, लेकिन अब इंटरपोल यानी इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन भी इनसे बच नहीं सका है। ठगों ने इंटरपोल के नाम से लोगों को ईमेल भेजना शुरू कर दिया है। साइबर क्राइम का हवाला देकर लोगों से फीस मांगी जा रही है।
अगर कोई फीस देने में देरी करता है तो उसे गिरफ्तारी का भय दिखाया जाता है। ये इंटरनेशनल ठग, पहले लोगों को अच्छी खासी आर्थिक चपत लगा देते हैं और बाद में खुद ही वह पैसा वापस दिलाने के लिए और पैसे की मांग करते हैं। अपने ईमेल में इन ठगों द्वारा अंतरराष्ट्रीय संस्था जैसे यूएनओ और आईएमएफ का जिक्र भी किया जाता है।
बता दें कि भारत की टॉप इन्वेस्टिगेशन एजेंसी सीबीआई, खुफिया एजेंसी ’आईबी’ और प्रवर्तन निदेशालय ‘ईडी’ आदि के नाम का दुरुपयोग होता रहा है। यहां तक कि इनके नाम पर ठगों ने फर्जी भर्ती परीक्षा आयोजित कर दी थी। भर्ती के नाम पर युवाओं से भारी फीस वसूली गई। ठगों की इन्हीं घटनाओं पर आधारित फिल्म ‘स्पेशल 26’ भी रिलीज हुई थी।
गत वर्षों में ठगों ने इन एजेंसियों के नाम से लोगों को ईमेल भेजना शुरू कर दिया है। उसमें लिखा जाता था कि आपके पास जो पैसा है, वह गलत तरीके से कमाया गया है। उसकी डिटेल छिपाई गई है। इस तरह से पैसा वसूली के दर्जनों हथकंडे अपनाए जाते रहे हैं। ये एजेंसियां समय-समय पर लोगों को ऐसे ठगों और उनके तौर तरीकों से बचने के लिए सचेत करती रहती हैं।
अब इंटरपोल ने लोगों को इसे लेकर सचेत किया है। इंटरपोल के मुताबिक, ऐसे ठग लोगों को बरगला रहे हैं। इनका मकसद लोगों को भय दिखाकर उनसे पैसा लूटना है। ये ठग इंटरपोल के नाम से लोगों को ईमेल भेज रहे हैं। इनके द्वारा इंटरपोल के नाम, चिन्ह और ईमेल प्रक्रिया आदि की कॉपी कर ली जाती है। यहां तक कि ये ठग ‘स्टैंप व लोगो’ भी बनवा लेते हैं। उसके बाद ये लोगों को संदेश भेजते हैं। उसमें कहा जाता है कि आप हमारे डाटा बेस में हैं। आपका बैंक अकाउंट हैक कर लिया गया है। हमें लगता है कि आप बड़ी साजिश का शिकार हो गए हैं। इंटरपोल आपकी मदद करेगा, बशर्ते आप कुछ जानकारी दें तो।
लोगों की डिटेल लेने के बाद वे लैटर ऑफ ऑथराइजेशन भेजते हैं। इसके पीछे वे तर्क देते हैं कि अब उनका खाता बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसके लिए एक तय राशि मांगी जाती है। खास बात है कि इस लैटर के साथ ठग एक और ईमेल भेजते हैं। इसमें अप्रत्यक्ष तौर पर धमकी का जिक्र होता है। अगर फीस देने में देरी हुई तो गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ठगों को जो व्यक्ति पैसे दे देता है। उसके पास एक अन्य ईमेल आता है। उसमें लिखा जाता है कि अब उनकी वह राशि रिकवर कराई जाएगी, जो ठगों ने लूटी है। इसमें यूएनओ और आईएमएफ जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का हवाला दिया जाता है। ठग विश्वास दिलाते हैं कि इन संगठनों की मदद से उनकी सौ फीसदी राशि रिकलर की जाएगी। इंटरपोल का कहना है कि उसकी तरफ से किसी को इस तरह का ईमेल नहीं भेजा जाता। किसी से पैसा या कोई फीस देने के लिए नहीं कहा जाता। बैंक डिटेल, पासवर्ड या अन्य कोई निजी जानकारी नहीं मांगी जाती।
अगर किसी व्यक्ति के पास इंटरपोल के नाम से कोई संदेश आता है तो उसकी शिकायत इंटरपोल को कर सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट पर एक लिंक दिया गया है। वहां पर शिकायत पोस्ट की जा सकती है। ऐसे मामलों की अनदेखी न करें, बल्कि तुरंत प्रभाव से उसकी शिकायत दें।