26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के लिए आंदोलनकारी किसानों ने ‘लक्ष्मण रेखा’ तय कर ली है। पांच अहम बातें हैं। संयुक्त किसान मोर्चा की सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर नजर है। मंगलवार को सरकार से दसवें दौर की वार्ता भी है और उसी दिन सुप्रीम कोर्ट के पैनल की पहली बैठक भी संभव है।
19 जनवरी को ही किसान आंदोलन में नई खिचड़ी पकने वाली है। नये सुर और राग की घोषणा का इंतजार है। ऐसे में सोमवार की सुनवाई में ट्रैक्टर परेड के अलावा किसान आंदोलन से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर सुनवाई संभव है।
26 को हर हाल में ट्रैक्टर परेड
संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया कि 26 जनवरी को हर हाल में ट्रैक्टर परेड होगी। दिल्ली के भीतर लेकिन आउटर रिंग रोड पर ही ट्रैक्टर परेड की तैयारी है। एक दिन पहले पंजाब के किसान संगठनों और रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक के बाद एलान किया गया कि ट्रैक्टर परेड की पूरी तैयारी और रुपरेखा तय कर ली गई है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद इसकी विस्तार से जानकारी दी जाएगी लेकिन फिलहाल ट्रैक्टर परेड की पांच अहम बातें तय की गई हैं।
ट्रैक्टर परेड की लक्ष्मण रेखा
ट्रैक्टर परेड दिल्ली के भीतर लेकिन आउटर रिंग से निकलेगी। ट्रैक्टर पर केवल तिरंगा और किसान संगठन का झंडा होगा। किसी भी सियासी दल का झंडा नहीं होगा। ट्रैक्टर परेड शांतिपूर्ण होगी। किसी सरकारी भवन, स्मारक आदि पर कब्जा नहीं होगा, न किसी को नुकसान पहुंचाया जाएगा। दिल्ली के लिए यही रणनीति तय की गई है। दूरदराज से दिल्ली न पहुंचने वाले राज्यों या जिला मुख्यालयों में किसान इसी शांति व संयम से प्रदर्शन करेंगे।
सोमवार के साथ मंगलवार भी अहम
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद मंगलवार को आंदोलनकारी किसानों और सरकार के बीच दसवें दौर की वार्ता प्रस्तावित है। सुप्रीम कोर्ट के पैनल की पहली बैठक भी मंगलवार को ही होने वाली है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान कमेटी के सदस्य किसान नेता भूपिंदर सिंह मान के अलग होने पर भी चर्चा संभव है।
एक साथ कई याचिकाएं हैं लेकिन दिल्ली को आंदोलनकारी किसानों द्वारा बंधक बनाने और ट्रैक्टर परेड को लेकर दिल्ली पुलिस की अर्जी पर सुनवाई से 26 जनवरी की दिल्ली की ट्रैक्टर परेड निर्भर करेगी। मंगलवार को ही सरकार के साथ किसान संगठनों की वार्ता है। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट के पैनल की बैठक भी है।
उसी दिन संयुक्त किसान मोर्चा की जनप्रतनिधि संघर्ष मोर्चा के साथ 23-24 जनवरी को होने वाली किसान संसद की नई खिचड़ी भी पकने वाली है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के अलावा सोमवार को ही किसानों का महिला आंदोलनकारी दिवस है। रविवार से ही महिलाओं का जुटना जारी है। ऐसे में सोमवार और मंगलवार काफी अहम साबित होने वाले हैं।