संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने गोगोई को नासमझ बताते हुए कहा कि उन्हें मंत्रालय के कामकाज की जानकारी नहीं है। रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का बचाव किया और उनके कार्यकाल में हुए डिजिटल सुधारों की तारीफ की।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। लोकसभा में गोगोई ने रिजिजू को सदन की कार्यवाही में सबसे बड़ी बाधा डालने वाला बताया था। इसके जवाब में रिजिजू ने मंगलवार को कहा कि विपक्षी सांसद को अपने विचार रखने का पूरा हक है, लेकिन वे मंत्रालय की भूमिका और जिम्मेदारी से अनभिज्ञ हैं।
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क्या बोले केंद्रीय मंत्री?
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के प्रस्ताव पर जवाब देते हुए रिजिजू ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्य संविधान के नियमों और कानूनों से बंधे हुए हैं। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। रिजिजू ने कहा कि जब कोई व्यक्ति खुद को सबसे ऊपर समझने लगता है, तो उसे टोकना जरूरी हो जाता है।
गौरव गोगोई पर क्या बोले रिजिजू?
गौरव गोगोई के दावों पर रिजिजू ने कहा कि गोगोई तीन बार से संसद सदस्य हैं, लेकिन उन्हें अब तक संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारियों का पता नहीं है। उन्होंने कहा, गोगोई मेरे छोटे भाई जैसे हैं। लेकिन मंत्रालय के कामकाज पर सवाल उठाने से पहले उन्हें काम करने के तरीके की बारीकियों को सीखना और समझना चाहिए। इससे पहले गौरव गोगोई ने रिजिजू पर हमला करते हुए कहा था कि भविष्य में जब संसद के रिकॉर्ड देखे जाएंगे, तो आंकड़े बताएंगे कि किरेन रिजिजू ऐसे मंत्री थे जिन्होंने विपक्ष को सबसे ज्यादा टोका।
स्पीकर ओम बिरला की तारीफ की
रिजिजू ने स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष के प्रस्ताव की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह सबको पता है कि स्पीकर सत्ताधारी दल से आते हैं, लेकिन पद संभालने के बाद वे सबके हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्पीकर से हमेशा निष्पक्ष रहने की उम्मीद की जाती है और ओम बिरला ने इसे बखूबी निभाया है।
रिजिजू ने ओम बिरला के कार्यकाल में हुए बड़े सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बिरला ने नए सदस्यों को सदन में बोलने का ज्यादा मौका दिया है। उनके समय में जनता से जुड़े जरूरी मुद्दे सबसे ज्यादा बार उठाए गए। संसद को पेपरलेस बनाना और रिकॉर्ड्स को डिजिटल करना भी उन्हीं की देखरेख में हुआ है। रिजिजू ने विपक्ष के इस व्यवहार पर दुख जताया।