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लोकसभा: किरेन रिजिजू ने कहा- अदालतों में 6.72 लाख मुकदमे 20 साल से लंबित, रिक्तियों को जल्द भरने को प्रतिबद्ध

Fri, 03 Feb 2023 06:34 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने अदालतों में लंबित मामलों के पीछे के कारण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि अदालतों में लंबित मामलों का अंबार केवल हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी के कारण नहीं है बल्कि कई अन्य कारकों के कारण भी है।
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केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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देश की निचली अदालतों में पिछले 20 वर्षों से करीब 6.72 लाख केस लंबित हैं। वहीं, हाईकोर्टों में यह संख्या करीब 2,94,547 है। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में बताया।

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रिजिजू ने अदालतों में लंबित मामलों के पीछे के कारण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि अदालतों में लंबित मामलों का अंबार केवल हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी के कारण नहीं है बल्कि कई अन्य कारकों के कारण भी है। रिजिजू ने कहा, अदालत के मामलों का लंबित होना एक बहुआयामी समस्या है। देश की जनसंख्या में वृद्धि और जनता के बीच अपने अधिकारों के बारे में जागरूकता के कारण नए मामले दर्ज करने में भी साल दर साल तेजी से वृद्धि हो रही है।

साथ ही किरेन रिजिजू ने रिक्तियों को भरने को लेकर बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शुक्रवार को संसद में कहा कि केंद्र सरकार समयबद्ध तरीके से रिक्तियों को तेजी से भरने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान उन्होंने अदालतों में लंबित मामलों के पीछे के कारण भी गिनाए। 
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हाई कोर्ट में नियुक्तियां एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा
इस दौरान उन्होंने संसद को यह भी बताया कि हाई कोर्ट में खाली पदों को भरना एक सतत, एकीकृत और सहयोगात्मक प्रक्रिया है, जिसके लिए विभिन्न संवैधानिक प्राधिकरणों से सलाह और अनुमोदन की जरूरत होती है। उन्होंने इसके कारण गिनाते हुए आगे कहा कि सेवानिवृत्ति, इस्तीफे या न्यायाधीशों की पदोन्नति के कारण रिक्तियां उत्पन्न होती रहती हैं। 

मामलों के लंबित होने के पीछे यह भी कारण
उन्होंने कहा कि अदालतों में बड़ी संख्या में लंबित मामलों का कारण केवल उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की कमी ही नहीं है। इसके कई अन्य कारण भी है जैसे राज्यों और केंद्रीय विधानों की संख्या में वृद्धि, प्रथम अपीलों का संचय , कुछ हाई कोर्ट में सामान्य सिविल क्षेत्राधिकार जारी रखना, हाई कोर्ट में जाने वाले अर्ध-न्यायिक मंचों के आदेशों के खिलाफ अपील, पुनरीक्षण/अपीलों की संख्या, बार-बार स्थगन, रिट क्षेत्राधिकार का अंधाधुंध उपयोग,  सुनवाई के लिए मामलों की निगरानी, ट्रैकिंग और बंचिंग के लिए पर्याप्त व्यवस्था की कमी, न्यायालयों की अवकाश अवधि, न्यायाधीशों को प्रशासनिक प्रकृति का कार्य सौंपना, आदि।

आठ साल में हाई कोर्ट में बढ़े 202 न्यायाधीश
कानून मंत्री ने आगे बताया कि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ-साथ राज्य सरकार की सहमति भी जरूरी होती है। क्योंकि उस हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अदालत के प्रशासन के लिए जिम्मेदार होते हैं वहीं, राज्य सरकार न्यायालय को बुनियादी सुविधाएं और न्यायाधीशों को वेतन आदि प्रदान करती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या साल 2014 में जहां 906 थी, वह 2022 में बढ़कर 1108 हो गई है।

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