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Keren Rijiju: कानून मंत्री ने कॉलेजियम प्रणाली पर खड़े किए सवाल, कहा- न्यायिक नियुक्तियों में तेजी पर हो विचार

Sun, 18 Sep 2022 05:36 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, उदयपुर।

सार

कानून मंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट और निचली अदालत की मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। न्याय प्रणाली को फिर से जीवंत करने का समय आ गया है।
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कानून मंत्री किरेन रिजिजू - फोटो : ट्विटर/किरेन रिजिजू
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विस्तार
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केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने देश की न्यायपालिका के कॉलेजियम पर सवाल खड़े किए। राजस्थान के उदयपुर में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में कहा कि न्यायिक नियुक्तियों में तेजी लाने के लिए वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली पर विचार करने की जरूरत है।

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उनके मुताबिक, किसी  व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है तो उसका सर्वोत्तम प्रयोग करने पर ध्यान दें। उदयपुर में ‘उभरते कानूनी मुद्दे-2022’ पर आयोजित सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अजय रस्तोगी, राजस्थान के कार्यवाहक सीजे एमएम श्रीवास्तव व कानून राज्यमंत्री एसपीएस बघेल भी मौजूद रहे।

जल्द भरे जाएंगे रिक्त पद : कानून मंत्री
कानून मंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट और निचली अदालत की मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। न्याय प्रणाली को फिर से जीवंत करने का समय आ गया है। इसके तहत रिक्त पदों को जल्द ही भरा जाएगा। भारत की न्यायपालिका स्वतंत्र है, लेकिन अगर कोई सोशल मीडिया पर गलत टिप्पणी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी
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डिजिटल विभाजन को पहचानकर उसे पाटना जरूरी : जस्टिस चंद्रचूड़
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा, देश में डिजिटल विभाजन के अस्तित्व को पहचानना और इस अंतर को पाटने के लिए कदम उठाना बेहद जरूरी है। ओडिशा के 30 जिलों में पेपरलेस कोर्ट के शुभारंभ के मौके पर उन्होंने कहा, कोरोना महामारी के बाद न्याय वितरण प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करने की जरूरत पड़ी। इसके लिए वीडियो लिंक से दूरस्थ सुनवाई और ई फाइलिंग शुरू हुई। 

कानूनी सहायता कार्यों पर अपनी ऊर्जा-समय लगाएं विधि स्नातक : सीजेआई
देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस उदय उमेश ललित ने विधि स्नातकों से अपील की कि वे अपनी ऊर्जा और समय कानूनी सहायता कार्यों में समर्पित करें। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ओडिशा के नौवें दीक्षांत समारोह में उन्होंने स्नातकों से अपने पेशे के प्रति पूर्ण जुनून और देश के लोगों के प्रति सहानुभूति दिखाने की अपील की।

सीजेआई ने कहा कि एक साल तक राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के साथ अपने जुड़ाव के दौरान उन्होंने पाया कि देश में कानूनी सहायता काम को कई बार उपेक्षा का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने इसका विस्तृत जिक्र नहीं किया लेकिन उन्होंने युवा स्नातकों से अपनी समय और ऊर्जा कानूनी कार्यों में लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद समाज हर मोड़ पर आपके योगदान की ओर देखेगा।

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