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India-US डील पर खरगे का हमला: कहा- व्यापार समझौता राष्ट्रीय हितों की बलि; मोदी सरकार ने किया विश्वासघात

Tue, 10 Feb 2026 05:06 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को राष्ट्रीय हितों की बलि बताते हुए मोदी सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाया।
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मल्लिकार्जुन खरगे, अध्यक्ष, कांग्रेस - फोटो : ANI
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विस्तार
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। खरगे ने इसे भारत के रणनीतिक राष्ट्रीय हितों की बलि बताते हुए इसे विश्वासघात और पारदर्शिता से मढ़ी हुई हार करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते के छिपे हुए प्रिंट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के राष्ट्रीय हितों को गिरवी रख दिया है।

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'भारत की संप्रभुता की हुई क्षति'
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का असली सच अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। यह समझौता भारत के राष्ट्रीय हितों की बलि देने वाला है। खरगे ने कहा कि इस समझौते में भारत को रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर किया गया है, जो देश की सामरिक स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने कहा हमें बताया गया था कि भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में रूसी तेल पर कोई टिप्पणी नहीं की गई थी, लेकिन व्हाइट हाउस के फैक्ट शीट में साफ लिखा है कि भारत को रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा।

"क्या यह जीत है या विश्वासघात?"
खरगे ने इस समझौते पर सवाल उठाते हुए पूछा 'क्या यह जीत है या एक पीआर में लिपटा हुआ विश्वासघात है, जो भारत के रणनीतिक राष्ट्रीय हितों और निर्यात इंजन की बलि चढ़ाता है?'
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किसानों के खिलाफ धोखा और विदेशी कृषि उत्पादों का आयात

  • खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पहली बार भारत के कृषि क्षेत्र को पूरी तरह से विदेशी उत्पादों के लिए खोल दिया है।
  • उन्होंने कहा अब हम समझते हैं कि भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में ‘अतिरिक्त उत्पाद’ से क्या मतलब था।
  • 'दाल' को अचानक व्हाइट हाउस के फैक्ट शीट में जोड़ा गया है, जबकि यह भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में नहीं था।
  • खरगे ने भारत के डेयरी किसानों का पक्ष लेते हुए कहा कि इस व्यापार समझौते में अमेरिकी पशु आहार के आयात को मंजूरी दी गई है, जो GM (जीन संवर्धित) होते हैं और इससे भारत के मवेशियों की नस्ल और दूध की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।

खुले तौर पर किसानों और डेयरी उद्योग को नुकसान
खरगे ने यह भी कहा कि अमेरिकी जीएम पशु आहार के आयात से भारत के मवेशियों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया दूसरे दो करोड़ डेयरी किसानों को इस निर्णय का नुकसान होगा, लेकिन आरएसएस और भाजपा गाय के नाम पर लिंचिंग करने वालों को इस देश की मवेशी नस्ल को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।

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कपड़ा उद्योग को भी हुआ नुकसान
खरगे ने यह भी कहा कि कपड़ा उद्योग को इस समझौते से भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा 18 प्रतिशत टैरिफ का कोई ‘ऐतिहासिक जीत’ नहीं है। अमेरिका-बांगलादेश समझौता ने इसे एक रणनीतिक आत्मसमर्पण में बदल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते ने बांगलादेश को अमेरिकी कॉटन का इस्तेमाल करने के लिए शून्य-शुल्क की सुविधा दी है, जबकि भारत के कपड़ा उद्योग को 18 प्रतिशत शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।

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