राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अपनी पोशाक में बदलाव करने की घोषणा के बाद अभी तक दम तोड़ती दिख रही खादी को राहत मिलने की उम्मीद दिख रही है। खादी ग्रामोद्योग आयोग को उम्मीद है कि निक्कर से पैंट में बदलाव के सहारे वह भी अच्छी कमाई कर सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार आयोग ने इस संबंध में संघ के वरिष्ठ नेताओं से बात की है ताकि उन्हें पैंट की सप्लाई की जा सके।
एक अनुमान के मुताबिक देशभर में सक्रिय स्वयंसेवकों की संख्या एक करोड़ से ज्यादा है। आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि उन्हें उम्मीद है इस डील से एक हजार करोड़ रुपये तक का व्यवसाय मिल सकता है, जो फिलहाल रोजाना 100 से 150 करोड़ के करीब है।
सक्सेना के अनुसार उनकी पहले से ही आरएसएस के बड़े नेताओं से इस संबंध में बात चल रही है, यह लगभग पक्का भी हो चुका है। इसका फायदा ये होगा कि इससे आयोग की कमाई के अलावा खादी से जुड़े ग्रामीण लोगों को रोजगार मिल सकेगा।