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Khabron ke Khiladi: प्रचार खत्म होते ही प्रधानमंत्री के ध्यान में क्यों मचा घमासान? बता रहे हैं खबरों खिलाड़ी

Sat, 01 Jun 2024 05:03 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लोकसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई। गुरुवार को प्रचार समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विवेकानंद रॉक पर जाकर ध्यान मग्न हो गए। अंतिम दौर के मतदान से पहले प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम का विपक्ष ने विरोध किया। विपक्ष ने इसकी शिकायत भी की। इस विषय पर ही इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई।
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Khabaron Ke Khiladi - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देश में चल रहे लोकसभा चुनावों में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई है। गुरुवार को प्रचार समाप्त होने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार तक विवेकानंद रॉक पर ध्यान मग्न रहे। अंतिम दौर के मतदान से पहले प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम का विपक्ष ने विरोध किया। विपक्ष ने इसकी शिकायत भी की।

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प्रतीकों को छूने की प्रधानमंत्री की इस कला का विपक्ष क्यों आपत्ति कर रहा है? क्या विपक्ष के पास दूसरा विकल्प था? इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। 



पूर्णिमा त्रिपाठी: ध्यान से किसी को कोई आपत्ति नहीं है। इससे किसी को ऐतराज नहीं होगा, लेकिन इस ध्यान से एतराज इसलिए हुआ, क्योंकि आखिरी चरण का मतदान होना है। पश्चिम बंगाल में मतदान होना है। ममता बनर्जी की एक टिप्पणी से बंगाल का वोटर उनसे कुछ नाराज बताया जा रहा है। ऐसे में विवेकानंद रॉक पर जाकर ध्यान करना किसी भी तरह से गैर-राजनीतिक नहीं है। इसी वजह से विपक्ष से इस पर सवाल उठाया। जो लाजमी है। 
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अनुराग वर्मा: कैमरा यूनिट सारे नेताओं के साथ चलती है। अगर विपक्ष इस पर इतना हंगामा नहीं करता तो यह एक साधारण घटना होती। एक तरह से विपक्ष ने इस मामले में अपनी राजनीति की और सत्ता पक्ष ने अपनी राजनीति की है। किसकी राजनीति सफल रही यह तो ईवीएम बता पाएगी। 

समीर चौगांवकर: प्रधानमंत्री मोदी की राजनीति को देखेंगे तो ये तो प्रधानमंत्री मोदी 2001 में जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तब से ये रहा है। राजनीतिक व्यक्ति अपने किसी कार्यक्रम को राजनीतिक तौर पर उसका इस्तेमाल करे तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता है। अगर विपक्ष को इससे आपत्ति है तो वह भी अपने समय का इस तरह से इस्तेमाल कर सकता था। 

विनोद अग्निहोत्री: चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक इसमें कोई भी उल्लंघन नहीं है। तकनीकी रूप से इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। रही बात कैमरे की तो कोई भी इवेंट होगा तो मीडिया जाएगा और उसे दिखाएगा भी। मोदी जी क्यों कहेंगे कि मुझे मत दिखाइए। अब प्रचार खत्म होने के बाद प्रचार बंद होना डिजिटल युग में अप्रासंगिक हो चुका है। अब तो कई वोटिंग चल रही होती है और कहीं प्रचार हो रहा होता है। 

जहां तक विपक्ष की आपत्ति की बात है तो उसके पास दो विकल्प थे, पहला या तो वह भी कोई ऐसा ही समानांतर कार्यक्रम करे या फिर पीएम के कार्यक्रम पर आपत्ति दर्ज करे। उसने दूसरा विकल्प अपनाया। बेहतर होता अगर विपक्ष ऐतराज करने के बजाय इससे बड़ी लकीर खींचता तो ज्यादा बेहतर संदेश जाता। 

अवधेश कुमार: ध्यान मनुष्य को भौतिकता से बाहर निकालता है। जब विपक्ष यह कह रहा है कि चौथे दौर में यह चुनाव हार चुके हैं। तब क्या वह साधना करने जाएंगे तो ईवीएम में सब कुछ बदल जाएगा। सेकुलर्जिम फंडामेंटिलज्म हमारे देश की राजनीति की बीमारी है। उससे हमारे देश के कई दल बाहर नहीं निकल पाए हैं।

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