फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Khabron Ke Khiladi: बिहार में मतदाता सूची पर विवाद से किसे फायदा और किसे नुकसान? खबरों के खिलाड़ी से जानें

Sat, 12 Jul 2025 05:02 PM IST
संध्या कुमारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहारी में विधानसभा चुनावों के करीब आने के साथ चुनाव आयोग ने मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण करने के आदेश दिए। इसे लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग के इस फैसले का विरोध कर रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को प्रक्रिया में कुछ और दस्तावेज शामिल करने के लिए कहा है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चुनाव आयोग के इस अभियान पर चर्चा हुई। 

विज्ञापन
बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण अभियान का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। इस पर एक सुनवाई भी हो चुकी है। लंबी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि वह पुनरीक्षण के लिए जरूरी दस्तावेजों में आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर कार्ड को शामिल करने पर विचार करे। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को करेगा। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी मामले पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, राकेश शुक्ल और हर्षवर्धन त्रिपाठी मौजूद रहे। 

विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक नहीं लगाई है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने अंतरिम रोक की मांग नहीं की है। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने कहा कि हम सांविधानिक संस्था को वह करने से नहीं रोक सकते, जो उसे करना चाहिए। कोर्ट ने चुनाव आयोग को अपना हलफनामा दायर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। वहीं याचिकाकर्ताओं को उसके एक सप्ताह बाद जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

रामकृपाल सिंह: मामला अभी कोर्ट में है इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। जब ये बात हुई कि चुनाव आयोग को नागरिकता देखने का कोई अधिकार नहीं है तो चुनाव आयोग ने ये तर्क रखा कि भारतीय नागरिक को वयस्क मताधिकार का अधिकार देना। इससे यह तय होता कि भारतीय नागरिक को ही वोटर बनाया जा सकता है। जो भारत का नागरिक नहीं उसे वोटर आई कार्ड नहीं मिल सकता है। सवाल ये है कि अगर चुनाव आयोग का ये काम नहीं है  कि वो नागरिकता जांच सकें तो जिसे ये अधिकार है वो हमे बताएं, जिससे हम उसे ही वोटर बना सकें। 

हर्षवर्धन त्रिपाठी: जो राजनीतिक दल घुसपैठियों के साथ खड़े हैं नुकसान उनका होगा। पूरे सिमांचल इलाके में जहां सौ लोग हैं वहां सवा सौ 130 आधार कार्ड बन गए हैं। अब जब सर्वोच्च न्यायालय यह कह रहा है कि आधार लागू करें तो इसे लागू कर दिया जाना चाहिए। भारत में अगर बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्यों पर कुछ लोग चुप्पी साध लेते हैं तो उनका कुछ ना कुछ फायदा तो होगा ही। 

समीर चौगांवकर: मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया है। 28 तारीख को इसकी फिर सुनवाई होगी। दोनों पक्षों को तब तक के लिए राहत है। चुनाव आयोग ने कहा कि 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अगले चार दिनों में हम बाकी लोगों को भी इससे जोड़ देंगे। इसके बाद हम 20 से 25 जुलाई के बीच घर-घर जाकर बाकी बचे हुए मतदाताओं को जोड़ देंगे। मुझे लगता है कि सभी दलों को इसके लिए सहयोग करना चाहिए। 28 तारीख की सुनवाई के बाद तय होगा आगे क्या होगा। 

विज्ञापन

राकेश शुक्ल: मेरा अब तक जो चुनावी अनुभव रहा है उसके आधार पर मुझे लगता है कि जो चुनाव आयोग पर टारगेट किया जा रहा है वो सिर्फ इसलिए कि अगर चुनाव हार गए तो…। 2009 की हार के बाद भाजपा ने ईवीएम पर हल्ला शुरू किया। 2014 से बार-बार विपक्ष ने ईवीएम पर सवाल उठाया। महाराष्ट्र चुनाव के बाद से मतदाता सूची को लाया गया है।  

विनोद अग्निहोत्री: जब कांग्रेस की सरकार थी तो तत्कालीन विपक्ष भी यही काम करता था। विपक्ष में जो होता है उसका आचरण और सत्ता पक्ष में उसका आचरण अलग होता है। ट्रेड यूनियन के नेता को आप कंपनी का चेयरमैन बना दीजिए तो वो अपने ही मांग पत्र की 50 फीसदी से ज्यादा बातें खारिज कर देगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया पर स्टे नहीं किया। हां ये सुझाव जरूर दिया कि आप आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड को भी शामिल करने पर विचार करें।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें