देश की बेटी विनेश फोगाट, देश के लिए गोल्ड लाने से चूक गईं। विनेश का वजन तय सीमा से महज 100 ग्राम ज्यादा था। विनेश के डिस्क्वॉलीफाई होने से पूरे देश में निराशा छाई। इस निराशा के बीच राजनीति भी शुरू हो गई। विरोधी दलों ने तो विनेश के डिस्क्वॉलीफाई होने के पीछे साजिश तक की बात कह दी। खेल पर हो रही इस राजनीति पर चर्चा इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में हुई।
समीर चौगांवकर: यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि विनेश के मामले में राजनीति हो रही है, लेकिन जब राजनेता देश के खेल संघों में जाएंगे तो खेलों में राजनीति तो होगी ही। मुझे लगता है कि अगर कोई खिलाड़ी खेलकर पहुंचता है तो उसकी काबलियत से पहुंचता है। देश को विनेश और नीरज चोपड़ा से गोल्ड की बहुत उम्मीद थी। हरियाणा में आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दल इस तरह से राजनीति कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह सरासर गलत है। कम से कम खेल और खिलाड़ियों को राजनीति से बख्श देना चाहिए।
बिलाल सब्जवारी: हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो खेल के मानक हैं उनका सम्मान करना चाहिए। किसी भी खिलाड़ी की हार को खेल भावना से देखना चाहिए। उनकी ओवरवेट होने की वजह से जो हुआ उस पर कुछ लोगों ने बयानबाजी करके अपना वजन घटा लिया। देश के सभी लोगों को इसका दुख है। जो खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करने जाते हैं वो देश की सरकार के खर्च पर ही जाते हैं। सरकार खिलाड़ी के खिलाफ साजिश कर रही है यह कहना हास्यास्पद है।
अवधेश कुमार: झूठ के आधार पर जो वातावरण बन रहा है वो बहुत गलत है। विनेश फोगाट का एक आंदोलन करना अलग विषय है। एक खिलाड़ी के तौर पर उनका देश का प्रतिनिधित्व करना एक अलग विषय है। उस पर इस तरह की राजनीति करना केवल मूर्खता है। जो है नहीं उसे बनाने की कोशिश की जा रही है। हमारे देश में झूठ की खेती करने वाले, माया पैदा करने वालों के खिलाफ लोगों को लड़ना पड़ेगा।
रामकृपाल सिंह: यह सोचना ही बहुत घृणित है कि देश की सरकार या कोई नेता ऐसा चाहेगा कि हमें पदक नहीं मिले। सच जो होता है उसके साथ चलने वाले बहुत कम लोग होते हैं। इस धरती पर बार-बार इस तरह की चीजें होंगी। कभी यह बहुत घृणित स्तर का भी होगा। जब तक व्यवस्था की बुराई से आप समझौता नहीं करेंगे तब तक आप सत्ता नहीं पा सकते हैं। इस तरह की ताकतें एक्सपोज होंगी बस समय लगता है।
विनोद अग्निहोत्री: जब खेल संघों में नेता रहेंगे, राजनीति वहां से शुरू होती है। मैं यह बिलकुल नहीं मानता कि हमारे देश की सरकार अपने खिलाड़ी के साथ कोई साजिश करेगी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिश तो हो सकती है। जिनका वर्चस्व टूट रहा है वो ऐसा कर सकते हैं। खेल में जिनका वर्चस्व टूट रहा है वो ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं।