विनोद अग्निहोत्री: पिछले 20-22 साल से बिहार में नीतीश कुमार की बहार है। चाहे वो किधर भी रहें। नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में ऐसा बांट है कि वो जिस पलड़े में आता है वो पलड़ा भारी हो जाता है। भाजपा चाहती है कि नीतीश कुमार नाम के लिए ही सही, लेकिन वो हमारे पाले में ही रहें। इसलिए वो सबकुछ बर्दाश्त कर रही है। भाजपा नीतीश के सहारे पूरे बिहार में अपनी सरकार बनाना चाह रही है। नीतीश कुमार को लेकर जो खबरें आती हैं वो चिंता का सबब है।
हर्षवर्धन त्रिपाठी: भाजपा के लिए यह कतई अच्छी स्थिति नहीं होगी कि जो उसके साथ है वो ही उसके लिए मुसीबत बन जाए। नीतीश जी विशुद्ध रूप से अभी दया के पात्र हैं, लेकिन वो दया के पात्र हैं तो इसका यह मतलब नहीं है कि बिहार को दया का पात्र बना दिया जाए। इस पूरे मामले में जवाबदेही किसकी होगी तो पहला नाम है उनके बेटे निशांत और दूसरा भाजपा जो कि सहयोगी हैं।
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