प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाने में क्या कांग्रेस ने देरी कर दी? राहुल ने वायनाड सीट ही क्यों छोड़ी? इन सभी सवालों पर इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार और राकेश शुक्ल मौजूद रहे।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में रायबरेली सीट का प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया है। राहुल वायनाड सीट से छोड़ेंगे। केरल की वायनाड सीट पर राहुल की बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उप-चुनाव में उम्मीदवार होंगी। कांग्रेस को इस फैसले से दक्षिण की राजनीति पर क्या असर होगा? प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाने में क्या कांग्रेस ने देरी कर दी? राहुल ने वायनाड सीट ही क्यों छोड़ी? इन सभी सवालों पर इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार और राकेश शुक्ल मौजूद रहे।
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समीर चौगांवकर: इतिहास देखेंगे तो दक्षिण हमेशा से कांग्रेस के लिए मुश्किल वक्त में एक बड़ा सहारा रहा है। गांधी परिवार और कांग्रेस के लिए दक्षिण हमेशा से मजबूत गढ़ रहा है। इंदिरा, सोनिया से लेकर राहुल तक यहां से लोकसभा जा चुके हैं। अब राहुल गए तो प्रियंका वहां से चुनाव लड़ रही हैं, यह वायनाड की जनता को नहीं अखरेगा। केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं ऐसे में यह कांग्रेस के लिए यह एक अच्छा निर्णय है। मुझे लगता है कि प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में देर से आई हैं। अब आई हैं तो मुझे लगता है कि जीतकर संसद पहुंचेंगी।
विनोद अग्निहोत्री: प्रियंका गांधी ने 2022 में उत्तर प्रदेश में पूरी ताकत लगाई। लेकिन, पार्टी सात से घटकर दो सीटों पर आ गई। वोट प्रतिशत भी घट गया। उस चुनाव में कांग्रेस यह साहस नहीं कर पाई कि पार्टी जीतेगी तो प्रियंका मुख्यमंत्री बनेंगी। वायनाड छोड़ने का फैसला राहुल गांधी के लिए मुश्किल था। अमेठी हारने और सोनिया के राज्यसभा जाने के बाद कांग्रेस अगर रायबरेली सीट छोड़ देती तो यह बड़ा जोखिम हो सकता था। उप-चुनाव की स्थिति में भाजपा पूरी ताकत से रायलबरेली सीट जीतने की कोशिश में लग जाती। जबकि, केरल में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। ऐसे में वायनाड से प्रियंका का जीतना आसान होगा। दक्षिण भारत में प्रियंका की उपस्थिति कांग्रेस के लिए अच्छा फैसला है।
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राकेश शुक्ल: यह संकल्पना लेकर चलना कि प्रियंका वाडनाड से जीतकर आएंगी तो चमत्कार कर देंगी। मुझे लगता है कि यह जल्दबाजी होगी। वायनाड सीट के समीकरण कांग्रेस के मुफीद है। इसी के चलते कांग्रेस ने प्रियंका को यहां से लड़ाने का फैसला लिया है। राहुल गांधी वायनाड टू रायबरेली आए हैं। मुझे लगता है कि 2029 में प्रियंका भी वायनाड टू अमेठी की यात्रा कर सकती हैं।
रामकृपाल सिंह: हम सिर्फ राहुल और प्रियंका पर ही सारा फोकस क्यों करते हैं? मैं व्यक्ति की ताकत को हमेशा गौढ़ मानता हूं। जो पार्टियां व्यक्ति केंद्रित हुईं वो खत्म हो गईं। आप पार्टी को मजबूत कर दें, यह अलग बात है। व्यक्ति केंद्रित होने से पार्टियों पर क्या असर पड़ता है इसके कई उदाहरण हैं। जैसे इंदिरा गांधी को 1971 में सभी ने वोट दिया था। छह साल के बाद 1977 में उन्हीं इंदिरा गांधी को उत्तर प्रदेश में एक सीट तक नहीं मिली थी। मेरा मानना है कि व्यक्ति को पार्टी के ऊपर नहीं रखना चाहिए। तभी आप लंबे दौर की लड़ाई लड़ सकते हैं।
अवधेश कुमार: राहुल गांधी को जिस तरह से राजनीति में लाया गया, प्रियंका को उस तरह से कभी मौके नहीं मिले। प्रियंका को चुनाव लड़ाने का निर्णय प्रियंका का है या नहीं पता नहीं। प्रियंका केरल से जीतकर आ जाएंगी तो क्या उनकी छवि राष्ट्रीय नेता की बनेगी? यह भी सवाल है। प्रियंका के केरल से चुनाव लड़ने से दक्षिण के समीकरण में कोई अंतर आ जाएगा यह मुझे नहीं लगता है।