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Khabaron Ke Khiladi: क्या खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन, विश्लेषकों ने बताया आगे कैसे बढ़ेगा ये आंदोलन?

Sat, 18 Jul 2026 05:30 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
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खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को दिल्ली पुलिस अपने साथ अस्पताल ले गई। जिसके बाद अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा कर दी। प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद मार्च का एलान कर रखा है। इसी दिन संसद का मानसून सत्र शुरू होना है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अनुराग वर्मा और मिहिर रंजन मौजूद रहे। 
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मिहिर रंजन: पिछले 48 घंटे में दिल्ली में क्या-क्या डेवलपमेंट हुआ है और क्या होने वाला है ये समझना होगा। प्रदर्शनकारी पिछले 20 दिन से बैठे हुए थे। 48 घंटे पहले दिल्ली के सीपी को हटा दिया गया। नए सीपी आए और अगले 24 घंटे के भीतर सोनम वांगचुक अस्पताल पहुंच जाते हैं। अन्ना आंदोलन के बाद जिस तरह से लोगों का विश्वास टूटा। उसकी वजह से भी इस आंदोलन को उतना समर्थन नहीं मिला। 
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पूर्णिमा त्रिपाठी: पेपर का मुद्दा बहुत बड़ा है, अफसोस की बात ये है कि राजनीतिक दल जिस मजबूती से इस मुद्दे को उठा सकते हैं, वो उस तरह से उठा नहीं रहे हैं। ऐसे आंदोलन सफल तब होते हैं जब एक रिस्पॉन्सिव सरकार होती है। मुझे नहीं लगता है कि ये मुद्दा बहुत बड़ा मुद्दा बनेगा। कांग्रेस जरूर ये मुद्दा उठा रही है। दूसरा नीट के बाद री-नीट भी हो गया और उसके नतीजे भी आ चुके हैं। इस वजह से ये मुद्दा अब उतना मजबूत नहीं रहा। 

राकेश शुक्ल: जिस मुद्दे को आप लेकर आए थे उसमें अंबेडकर कहां से आए। फिर आप उसमें संविधान लेकर आए। आपने अंबेडकर की तस्वीर को ढाल बनाया। फिर आप जंतर-मंतर पहुंच गए। ऐसी बातें जो देश की आस्था को ठेस पहुंचाएं वो इस मंच से कही जाएंगी तो समर्थन कहां से मिलेगा। सरकारें सब एक जैसी होती हैं। 
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अनुराग वर्मा: ये आंदोलन पूरी तरह से कन्फ्यूज्ड आंदोलन है। वो पूरा क्षेत्र एक पिकनिक स्पॉट की तरह बन गया। सारे मनोरंजन के साधन, भोजन के साथ वहां मौजूद हैं। अन्ना हजारे का आंदोलन एक जन आंदोलन था, ये आंदोलन कुछ लोगों का आंदोलन है। एरोगेंस सरकार का स्वभाव होता है। उस वक्त सरकार अन्ना हजारे से बात करने इसलिए गई थी क्योंकि वो आंदोलन जन आंदोलन बन गया था। 

विनोद अग्निहोत्री: अभिजीत दिपके सीजेआई की टिप्पणी के बाद चर्चा में आए। सोशल मीडिया पर मिले फॉलोअर्स के बाद उन्हें गलतफहमी हो गई कि वो जब भारत आएंगे तो उनके स्वागत में करोड़ों लोग आएंगे। अन्ना आंदोलन से लोग ठगे हुए महसूस करते हैं। ये भी उसी टैंपलेट पर आए थे। आंदोलन का एक पूरा तरीका होता है। नीट का मुद्दा अब मुद्दा बचा नहीं है।
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