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Khabaron Ke Khiladi: बिहार में चढ़ा सियासी पारा, खबरों के खिलाड़ी ने बताया कौन किस मुद्दे को दे रहा हवा

Sat, 23 Aug 2025 05:13 PM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार में यह चुनावी साल है। चुनावों की तारीखों का एलान को अभी नहीं हुआ है, लेकिन चुनावों की तैयारी में सभी राजनीतिक दल अपनी ताकत झोंक रहे हैं। 

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खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चुनाव तारीखों के एलान से पहले ही बिहार में सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भी बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' जारी है। विधायकों के दलबदल का सिलसिला भी शुरू हो गया है। बीते हफ्ते बिहार में हुई इन्हीं सियासी हलचलों पर इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, अवधेश कुमार, पूर्णिमा त्रिपाठी, विजय त्रिवेदी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। 

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विजय त्रिवेदी: राहुल और तेजस्वी यादव लगातार काम कर रहे हैं। इसका कितना असर पड़ेगा ये तो अभी नहीं बताया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात करें तो वो मुश्किल जगहों पर जा रहे हैं। ये एक अच्छे नेता की पहचान होती है। यहां पर महागठबंधन और एनडीए दोनों गठबंधन मजबूत हैं। केवल हनुमान की भूमिका तय होनी है। 
 

विनोद अग्निहोत्री: मगध प्रचीन भारत की सत्ता का केंद्र रहा है। प्रधानमंत्री न सिर्फ मुश्किल चुनौतियों को लेते हैं बल्कि, नरेटिव भी सेट करते हैं। इसलिए कई बार विपक्ष जीती बाजी हार जाता है। राहुल और तेजस्वी की बात करें तो एसआईआर का मुद्दा लंबा मुद्दा नहीं है। ये सिर्फ तात्कालिक मुद्दा है। आपको बेरोजगारी, अपराध, नीतीश की सक्रियता जैसे मुद्दों को विपक्ष को उठाना पड़ेगा। विपक्ष सरकार को एसआईआर के मुद्दे पर नहीं घेर सकता है। उसे घेरने के लिए स्थानीय मुद्दों  पर विपक्ष को जाना होगा। इसलिए तेजस्वी और राहुल बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर शिफ्ट हो रहे हैं। 

 

 

अवधेश कुमार: राहुल बेरोजगारी पर यात्रा नहीं कर रहे हैं। उनकी यात्रा का नाम 'वोटर अधिकार यात्रा' है। राहुल के मुद्दों पर उन्हें कितनी सफलता मिलेगी यह देखना होगा। प्रधानमंत्री की जहां तक बात है तो उनकी यह छठी यात्रा है। हर बार वो जब जाते हैं तो उसकी रणनीति होती है। पहले से एक प्लानिंग होती है। प्रधानमंत्री काम को लेकर जा रहे हैं फिर बता रहे हैं कि हमारे और आपके बीच क्या अंतर है। 

अनुराग वर्मा: राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने तीन चुनाव लड़े और तीनों हारे हैं। इसलिए उनकी व्यग्रता बढ़ती जा रही है। तेजस्वी यादव के लिए भी यही स्थिति है। बिहार राहुल गांधी और एनडीए दोनों के लिए एक प्रयोगशाला है। जिस तरह से पहले राहुल 'चौकीदार चोर है' वाला नारा गढ़ा था वैसे ही अब 'वोट चोर गद्दी छोड़' का नारा लेकर आए हैं। बिहार चुनाव से राहुल को यह तय करना है कि 2029 का चुनाव किस तरह लड़ा जाएगा। बिहार का चुनाव कुछ न कुछ नई दिशा देने वाला है। 

 

 

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पूर्णिमा त्रिपाठी: बिहार में राहुल-तेजस्वी की यात्रा एक मुद्दे को लेकर शुरू हुई थी। अब उन्हें जो रिस्पॉन्स मिल रहा है उसे देखते हुए अन्य मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं। दो महीने में चुनाव हैं। अभी जो माहौल है उसमें दो बातें साफ हैं, पहला नीतीश की दावेदारी बहुत कमजोर है। चुनाव जरूर उनके नेतृत्व में लड़ा जाएगा। वहीं, विपक्ष की ओर से यह तय है कि तेजस्वी ही चेहरा होंगे। इसका फायदा किसे होगा और किसे नुकसान होगा यह तो बाद में पता चलेगा। प्रशांत किशोर एक एक्स फैक्टर जरूर दिखाई दे रहे हैं। उनका कितना असर होगा यह तो नतीजों में पता चलेगा।


 
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