सीईसी विरोधी प्रदर्शन पर विपक्ष बनाम सीजेपी।
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दिल्ली में इस हफ्ते भी सड़कों पर हो रहे प्रदर्शन सुर्खियों में रहे। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की तरफ से कराई जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई दल इन प्रदर्शनों में नजर आए। वहीं, सीजेपी भी इन प्रदर्शनों में उतरी। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इन प्रदर्शनों पर ही चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
राकेश शुक्ल: आंदोलन होता है, आंदोलन होना चाहिए। सरकार अगर कहीं कुछ गलत कर रही है तो उसका विरोध होना चाहिए। लेकिन बांग्लादेश मॉडल की बात होती है तो इसका मतलब ये नहीं होगा कि ये सत्ता परिवर्तन है ये तख्तापलट होगा। आज जो लोग भाजपा को हटाने के लिए कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकार बने हैं वो कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए भी प्रमुख रणनीतिकार रहे हैं। इसमें आप योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का नाम ले सकते हैं।
अनुराग शुक्ल: इस पूरे आंदोलन को आम आदमी पार्टी का दूसरे संस्करण कॉकरोच जनता पार्टी ने शुरू किया। फिर लेफ्ट के संगठन इससे जुड़े। इसके बाद राहुल गांधी भी इसमें शामिल हो गए। कांग्रेस इस वक्त वामपंथी पार्टियों की तरह व्यवहार कर रही है। अब ये आंदोलन लेफ्ट और राइट के बीच हो गया है और कांग्रेस लेफ्ट में दिख रही है।
विनोद अग्निहोत्री: इस तरह के आंदोलनों में इस तरह की भाषा पहले भी बोली जाती रही है। भारत जैसे देश में रिजिम चेंज कभी हिंसा से नहीं हुआ। न ही होगा। ये देश बहुत बड़ा है इसलिए पूरा देश एक ही दिशा में सोच ही नहीं सकता है। यहां पांच लाख लोग इकट्ठा कर लीजिए फिर भी रिजिम चेंज नहीं होगा। भारत में रिजिम चेंज या तो चुनाव से होता है या गठबंधन में दारर पड़ने पर होता है या फिर प्रधानमंत्री खुद इस्तीफा दे देता है।
पीयूष पंत: सीधी-सीधी टक्कर भाजपा और कांग्रेस में है। इंडिया अगेस्ट करप्शन के पीछे कौन था ये सभी का पता है। सीजेपी की शुरुआत कैसे हुई। ये भी देखना होगा। जब दिपके बड़े होने लगे तो उसके बाद चीजें बदलने लगीं। दिपके को जो समर्थन मिला वो चौंकाने वाले रहा। जब उन्हें लगा कि हम बहुत सफल हो गए हैं तो उनको लगा कि नया मुद्दा पकड़ा दिया गया। भाजपा को अगर कोई चुनौती दे सकता है तो वो कांग्रेस है।