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Khabaron Ke Khiladi: बिहार में किस गठबंधन में कितनी रार, विश्लेषकों ने बताया कहां पहुंची सीटों की बात

Sat, 14 Jun 2025 09:15 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा-जदयू, राजद-कांग्रेस के अलावा अन्य राष्ट्रीय-स्थानीय दल गठबंधन की योजना पर विचार में जुटे हैं। सभी पार्टियां आपस में फॉर्मूला तय होने की बात भी कह रही हैं, हालांकि स्थितियां साफ नहीं हैं। 
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खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में इस साल के अंत में चुनाव है। इससे पहले सभी दल और गठबंधन तैयारी में जुट गए हैं। इसी कड़ी में महागठबंधन की बैठक में सीटों के बंटवारे और गठबंधन के चेहरे को लेकर बैठक हुई। बैठक के बाद कहा जा रहा है कि कुछ फॉर्मूले तय भी हो गए हैं। वहीं, एनडीए के सहयोगी एलजेपी आर के चिराग पासवान ने राज्य की सभी 243 सीटों पर तैयारी की बात कहके अलग सियासी हलचल पैदा कर दी। बिहार में जारी इसी सियासी हलचल पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी, हर्षवर्धन त्रिपाठी और राजकिशोर मौजूद रहे। 
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पूर्णिमा त्रिपाठी: राजद चाहेगा कि तेजस्वी के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाए। वहीं, कांग्रेस अभी इस पर कुछ तय नहीं करना चाहती है। इसके बाद भी यह कहा जा सकता है कि तेजस्वी महागठबंधन का तय चेहरा हैं। इस बार भी मुझे नहीं लग रहा है कि कांग्रेस इस पर कोई विरोध करेगी। चेहरा घोषित होने से कई बार चुनाव से मुद्दे गायब हो जाते हैं। कांग्रेस चाहती है कि बेरोजगारी और लॉ एंड ऑर्डर जैसे मुद्दों पर जोर दिया जाए। एनडीए में चिराग पासवान की वजह से बहुत बड़ा पेंच फंसा हुआ है। क्योंकि उन्होंने सभी 243 सीटों पर तैयारी करने की बात कही है। चिराग पासवान को जो सीटें दी जाएंगी तो वो किसके कोटे से जाएंगी। इस पर भी कोई कुछ नहीं कह रहा है। 
 

राकेश शुक्ल: इस बार महागठबंधन के लिए दो बड़े सवाल हैं। पहला- क्या असदुद्दीन ओवैसी को महगठबंधन में शामिल किया जाएगा और दूसरा- क्या कांग्रेस कन्हैया कुमार को चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करेगी? मौजूदा परिस्थियों पर महागठबंधन किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है। राहुल गांधी का बिहार में लगातार चहलकदमी करना, तेजस्वी का खुद को प्रोजेक्ट करना, दूसरे दलों का रुख बता रहा है कि महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है। 

हर्षवर्धन त्रिपाठी: भाजपा को पता है कि नीतीश बिहार की राजनीति में कितना भी कमजोर हो जाएं, लेकिन अप्रासंगिक नहीं हैं। नीतीश कुमार जहां खड़े हैं वहां से वो बारगेन की स्थिति में हैं। कहा जाता है कि पिछले विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने राहुल की रैलियां रुकवा दीं थीं। अब वो स्थिति नहीं है की कांग्रेस साथ में लटककर जाएगी। हालांकि, ड्राइविंग सीट पर तेजस्वी ही रहेंगे। मुझे लगता है कि दोनों गठबंधन अपनी-अपनी तैयारी कर रहे हैं और बिहार में इस बार बहुत ही शानदार चुनाव होने वाला है। 

राजकिशोर: चिराग का फैक्टर एक है, क्योंकि राम विलास पासवान की लेगेसी पशुपति पारस के साथ जाती नहीं दिख रही है, वो चिराग के साथ जाती हुई दिख रही है। बिहार का मनोवज्ञान समझना होगा। नीतीश कुमार ने बिहार को रहने लायक बनाया है। नीतीश का कोर वोटर वो है जो लालू राज में सताया गया है और उनकी दूसरी वोटर हैं- वहां की महिलाएं। चिराग की बात जहां तक है तो उनके एक्स फैक्टर की जो बात हो रही है वो रहेगा। महागठबंधन में तेजस्वी के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जितने भी क्षेत्रीय दल हैं उनको डर भाजपा और कांग्रेस से ही लगता है। मैं फिर से कह रहा हूं कि नीतीश और तेजस्वी के चेहरों पर ही चुनाव होगा। 
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समीर चौगांवकर: बिहार के दोनों गठबंधनों को देखें तो मुझे लगता है कि समस्याएं एनडीए में ज्यादा हैं। महागठबंधन में यह तय है कि चेहरा तेजस्वी ही होंगे। महगठबंधन की बैठकें भी चल रही हैं। कांग्रेस की यह कोशिश होगी कि उसे वो सीटें मिलें जो वो जीत सके। भाजपा चाहेगी कि इस बार नहीं तो कब। आप 20 साल से नीतीश को मुख्यमंत्री बना रहे हैं। इस वक्त भाजपा बेहतर स्थिति में है। वो चाहेगी कि अपना मुख्यमंत्री बने। महागठबंधन में ओवैसी आना चाहेंगे, क्योंकि उनको पता है कि अगर अलग से जीतकर मेरे विधायक आएंगे तो वो महागठबंधन में चले जाएंगे। कुल मिलाकर दोनों गठबंधन में समस्याएं हैं। किसी में कम किसी में ज्यादा।
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