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गूगल बाढ़ में फंसे लोगों के लिए ऑफलाइन लोकेशन फीचर लाया
गूगल ने बाढ़ में फंसे लोगों के लिए कोड प्लस फीचर भी उपलब्ध कराया है। इसके माध्यम से ऑफलाइन रहकर भी गली के पते की लोकेशन शेयर हो सकेगी। यूजर को सिर्फ कॉल या एसएमएस भेजना होगा। प्लस कोड का कोड जगह की लोकेशन दिखाएगा। बाढ़ से केरल का पयर्टन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। खासकर मुन्नार में, जहां 12 साल बाद नीलकुरंजी के फूल खिले हैं। बारिश से वेस्टर्न घाट के इको सेंसटिव माउंटेन रेंज को भी नुकसान पहुंचा है।
कारण-1
जो डैम बाढ़ को मैनेज कर सकते थे, वो पहले ही खोले
केरल में 41 छोटी-बड़ी नदियों पर 80 बांध हैं, जिनमें 36 बड़े हैं। एक डैम सेफ्टी अफसर ने कहा कि बड़े डैमों से बाढ़ को मैनेज किया जाता रहा है। लेकिन, इस बार बारिश की चेतावनियों के चलते बड़े डैमों के गेट पहले ही खोल दिए गए। जबकि, इनमें भारी बारिश के दौरान पानी स्टोर किया जा सकता था। बारिश कुछ कम होने की स्थिति में धीरे-धीरे छोड़ा जा सकता था। जैसा कि पहले के वर्षों में किया जाता रहा है। एक दिन में 164% ज्यादा बारिश हुई, कुछ जगह तो 600% तक बारिश हुई।
कारण-2
जहां बिजली बनती है, उन डैमों में पानी भरने दिया गया
बाढ़ की स्थिति जुलाई में ही बन गई थी। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन जारी था, खासकर कोझिकोड और इडुक्की में। जुलाई मध्य तक इडुक्की और इदामालय के डैम 50% भर गए। फिर एक पखवाड़े में पूरी तरह भर गए। बिजली बोर्ड ने इनके भरने का इंतजार इसलिए किया, क्योंकि अधिक बिजली पैदा कर ज्यादा पैसे कमा सके। डैम ओवरफ्लो होने लगे और बारिश भी नहीं थमी तो इन्हें खोलना पड़ा, जिससे तबाही ज्यादा हुई।
कारण-3
डैम के गेट खोलने से पहले चेतावनी भी जारी नहीं की
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में वायनाड जिले के लोगों के हवाले से कहा गया है कि स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने बानासुरासागर डैम से पानी छोड़ने से पहले अलर्ट तक जारी नहीं किया। इससे लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचने का समय नहीं मिला। मुल्लापेरियार डैम के आसपास के लोग भी कहते हैं कि पड़ोसी राज्य तमिलनाडु ने गेट खोलने से पहले चेतावनी जारी नहीं की। इससे इडुक्की रिजर्वायर में बाढ़ आ गई। 40 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसलें, 1000 से ज्यादा घर तबाह, 134 पुलों को नुकसान, पीने का पानी लगभग खत्म।
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एनडीआरएफ का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
केरल के 14 में से 11 जिलों में रेड अलर्ट, मृतक संख्या 194 हुई, 36 से ज्यादा लापता
3.53 लाख लोग 3,026 कैंपों में पहुंचाए, 24 घंटे में 82 हजार लोगों को बचाया गया
58 एनडीआरएफ टीमें, 150 से ज्यादा दल सेना के जुटे
24 एयरक्राफ्ट, 68 हेलिकॉप्टर, तीन जहाज कोस्टगार्ड के, 40 हजार पुलिसकर्मी और 3200 फायर टेंडर बचाव कार्य में लगे हैं। सेना ने 13 अस्थाई पुल बनाकर 38 इलाकों को फिर से जोड़ दिया है।
औसत
82 टीमें नौसेना की
13 टीमें वायुसेना की
18 टीमें थलसेना की
42 टीमें कोस्ट गार्ड की
(हर टीम में लगभग 40 जवान)
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