केरल पुलिस ने एक डॉक्टर को वर्चुअल गिरफ्तारी से बचाया, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो गए थे। ये धोखेबाज खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर डॉक्टर से पैसे मांग रहे थे।
पुलिस की सतर्कता बनी वरदान
कोट्टायम के पुलिस अधीक्षक शाहुल हमीद ने बताया कि केरल पुलिस के साइबर सेल और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अधिकारियों ने मिलकर इस धोखाधड़ी का पता लगाया। साथ ही डॉक्टर से धोखाधड़ी से लिए गए पांच लाख रुपये में से अधिकतर राशि को बरामद कर लिया।
एसबीआई ने दी जानकारी
साइबर सेल के एक अधिकारी ने कहा कि संदिग्ध लेनदेन की निगरानी के लिए एसबीआई के पास एक वित्तीय ट्रैकिंग प्रणाली है। यह घटना मंगलवार को घटी, जब एसबीआई ने डॉक्टर द्वारा एक उत्तर भारतीय अकाउंट में पांच लाख रुपये का संदिग्ध ट्रांजेक्शन देखा। एसबीआई ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और चंगनाचेरी पुलिस स्टेशन से अधिकारी डॉक्टर के घर पहुंचे।
ऐसे डॉक्टर को बचाया
उन्होंने बताया कि जब अधिकारी डॉक्टर के घर पहुंचे तो उन्होंने अंदर नहीं आने दिया क्योंकि धोखेबाज ने उसे निर्देश दिया था कि वह किसी को अंदर न आने दे। जब पुलिस अधिकारी को यह पता चला तो वह जबरदस्ती घर में घुस गए और डॉक्टर का फोन चेक किया। फोन की जांच करने पर पता चला कि वह वर्चुअल गिरफ्तारी का शिकार हो गया था। पुलिस ने जल्दी से कार्रवाई की और लगभग 4.65 लाख रुपये वापस करवा लिए, जबकि 35,000 रुपये की राशि बरामद नहीं की जा सकी।
धोखेबाजों ने डॉक्टर को झूठे पत्र भेजे थे, जिनमें आरबीआई और सुप्रीम कोर्ट का फर्जी लेटरहेड था। इनमें कहा गया था कि डॉक्टर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामले है, जिसकी जांच की जा रही है। फिर एक धोखेबाज ने खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर डॉक्टर से पैसे भेजने को कहा।
एसबीआई और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की वजह से यह बड़ा नुकसान होने से बच गया। केरल पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और ऐसे धोखों से बचने के लिए जागरूक रहने की अपील की।