वंदे भारत मिशन की उड़ान से स्वदेश लौट रहे कई लोगों के लिए यह यात्रा काल बनकर सामने आई। भारी बारिश के बीच लैंड करने की कोशिश में हुए विमान हादसे ने कई सवाल तो खड़े किए ही हैं, लेकिन एयरपोर्ट अधिकारियों के हवाले से यह बात भी सामने आ रही है कि इस दुर्भाग्यशाली उड़ान के कमांडर डीवी साठे ने विमान को बचाने की अंतिम दम तक कोशिश की। वे हादसे को तो नहीं टाल पाए, लेकिन अपनी जान देकर भी विमान के अधिकतर यात्रियों की जान बचाने में कामयाब रहे।
हादसे में जान गंवाने वाले पायलट कैप्टन दीपक वसंत साठे और सह पायलट अखिलेश कुमार थे। पूर्व वायुसेना अफसर साठे ने आखिरी समय तक विमान को बचाने की पुरजोर कोशिश की। 1981 में वायुसेना में भर्ती साठे 2003 में स्क्वॉड्रन लीडर के रूप में रिटायर हुए। उन्हें एनडीए में स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से नवाजा गया था। साठे बोइंग 737 भी उड़ा चुके थे।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट ने लैंडिंग से पहले आसमान में कई चक्कर लगाए। पायलट ने विमान को बचाने की पूरी कोशिश की, मगर आखिरी वक्त में उतारना ही पड़ा। भारी जमा पानी व विमान के फिसलने से हादसा टाला नहीं जा सका।
उतरने से पहले दो चक्कर लगाए...
एक विमान यात्री रियास ने कहा कि लैंड करने से पहले पायलट ने दो चक्कर लगाए थे। रियास ने कहा, मैं पिछली सीट पर था। अचानक बहुत तेज शोर हुआ और उसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता। एक अन्य यात्री फातिमा ने कहा कि विमान बेहद तेजी से जमीन से टकरा कर बहुत तेजी से दौड़ता चला गया।
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डीजीसीए ने दिए जांच के आदेश... पिछले साल चेताया भी था
डीजीसीए ने हादसे की जांच का आदेश दिया है। डीजीसीए ने पिछले साल कोझिकोड के कारीपुर एयरपोर्ट पर खतरे की चेतावनी दी थी। उड्डयन नियामक ने कहा था कि यहां रनवे पर बहुत ज्यादा रबर का जमाव होने से विमानों का उतरना खतरनाक है। नियामक ने कहा था कि बारिश में घर्षण कम हो जाता है।
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नतीजतन रनवे पर विमान के फिसलने का खतरा बढ़ जाता है। कोझिकोड में हुए हादसे ने टेबलटॉप एयरपोर्ट की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई 2010 में मंगलूरू के टेबलटॉप एयरपोर्ट पर भी इसी तरह विमान के फिसलकर खाई में गिरने से 158 यात्रियों की मौत के बाद भी विशेषज्ञों ने सलाह दी थी कि कारीपुर और लेंगपुई (मिजोरम) जैसे टेबलटॉप रनवे पर प्लेन की लैंडिंग के लिए खास प्रशिक्षण की जरूरत है।
पहले भी हुए हैं कोझिकोड में हादसे
- 7 नवंबर, 2008 : जेद्दाह से आए विमान का पंख जमीन से टकराया। जनहानि नहीं।
- 9 जुलाई, 2012 : विमान भारी बारिश से फिसला। लैंडिंग गियर टूटा। जनहानि नहीं।
- 25 अप्रैल, 2017 : एयर इंडिया के विमान का उड़ान भरते समय इंजन फेल। टायर फटा। यात्रा सुरक्षित उतारे।
- 4 अगस्त, 2017 : बंगलूरू से आ रहा विमान लैंडिंग के दौरान फिसल कर क्षतिग्रस्त हो गया। कोई हताहत नहीं।