केरल पुलिस ने अंगदान करने वालों और प्राप्तकर्ताओं के लिए जाली दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में शुक्रवार को पांच लोगों को हिरासत में लिया गया और कई स्थानों पर छापेमारी की गई। कुन्नाथुनाडु पुलिस ने छापेमारी के बाद दो मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान एर्नाकुलम जिले के पेरिंगाला के नजीब कल्लाथारा और उनकी पत्नी रशीदा, एर्नाकुलम के कुन्नाथुनाडु के सनी वर्गीस और उनकी पत्नी सिनी वर्गीस और एर्नाकुलम के चेलक्कुलम, पट्टीमट्टम के सनोज केपी के रूप में की है।
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आरोपियों को उनके आवासों और पल्लीकारा स्थित एक डिजिटल स्टूडियो पर छापेमारी के बाद हिरासत में लिया गया। पुलिस इस रैकेट का हिस्सा होने के संदेह में आसिफ की भी तलाश कर रही है। अंगदान प्रक्रिया में जटिल सत्यापन शामिल होता है, जिसके लिए पुलिस, स्थानीय निकायों, डॉक्टरों, विधायकों और सांसदों से प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। आरोपियों ने कथित तौर पर ऐसे प्रमाण पत्रों में हेराफेरी की थी। छापेमारी के दौरान कंप्यूटर, मोबाइल फोन और डीवीआर जब्त किए गए।
गिरोह ने कोच्चि के दो निजी अस्पतालों के जाली लेटरहेड और फर्जी पुलिस मंजूरी प्रमाण पत्र बनाए थे। उन्होंने पूर्व विधायक सीएच कुन्हाम्बु, केपी मोहनन, दलीमा जोजो, सांसद हिबी ईडन, के राधाकृष्णन और पूर्व मुख्य सचेतक एन जयराज के फर्जी पत्र और लेटरपैड भी तैयार किए थे। अंबलपुझा के पुलिस उप अधीक्षक और कुन्नमकुलम के सहायक पुलिस आयुक्त के लेटरहेड भी जाली बनाए गए थे। आरोपियों ने कई प्रमुख डॉक्टरों के सिफारिशी पत्रों में भी हेराफेरी की थी।
पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू कर दी है, जिन्होंने कथित तौर पर इस गिरोह से अंगदान प्रक्रियाओं के लिए सहायता प्राप्त की थी। अधिकारियों ने बताया कि इस रैकेट और अन्य राज्यों के लोगों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है। ये मामले भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं के तहत दर्ज किए गए हैं जो जालसाजी और जाली दस्तावेजों के उपयोग से संबंधित हैं। पुलिस इस मामले में शामिल सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल कर रही है।