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DRDO: ओडिशा तट पर 'TARA' की परीक्षण उड़ान सफल, जानें पहले स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम की खासियत

Fri, 08 May 2026 11:46 AM IST
रिया दुबे पीटीआई, नई दिल्ली

सार

भारत ने ओडिशा तट के पास स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम TARA का पहला सफल परीक्षण उड़ान किया। डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना द्वारा विकसित यह प्रणाली बिना गाइडेड वारहेड को सटीक निशाना साधने वाले प्रिसिजन गाइडेड हथियार में बदलने में सक्षम है। 
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डीआरडीओ ने TARA का किया सफल परीक्षण - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी रूप से विकसित ग्लाइड वेपन सिस्टम 'टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑग्मेंटेशन' (TARA) का पहला सफल परीक्षण उड़ान किया गया है। 

किसने किया तैयार?

ओडिशा तट के पास गुरुवार को किए गए इस परीक्षण को भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना (IAF) ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया। रक्षा मंत्रालय ने इसे भारत की प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

TARA की क्या है खासियत?

  • रक्षा मंत्रालय के अनुसार, TARA भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है।
  • इसे बिना दिशा-निर्देश वाले वारहेड को अत्यधिक सटीक निशाना साधने वाले प्रिसिजन गाइडेड हथियार में बदलने के लिए विकसित किया गया है।
  • इस तकनीक के जरिए पारंपरिक और कम लागत वाले हथियारों की मारक क्षमता और सटीकता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

क्या है इस प्रणाली का उद्देश्य?

मंत्रालय ने बताया कि इस प्रणाली को हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशाला रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने अन्य डीआरडीओ लैब्स के सहयोग से विकसित किया है। इसका उद्देश्य कम लागत में ऐसे अत्याधुनिक हथियार तैयार करना है, जो दुश्मन के जमीनी ठिकानों को बेहद सटीकता के साथ निशाना बना सकें।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्लाइड वेपन सिस्टम पारंपरिक बमों को आधुनिक गाइडेंस तकनीक से लैस करता है, जिससे वे लंबी दूरी तक जाकर लक्ष्य को अधिक सटीकता से भेद सकते हैं। TARA प्रणाली में अत्याधुनिक लेकिन कम लागत वाली तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे भविष्य में भारतीय सशस्त्र बलों को कम खर्च में उच्च क्षमता वाले प्रिसिजन हथियार उपलब्ध हो सकेंगे।

परीक्षण के दौरान किन चीजों को ध्यान रखा गया?

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस सफल परीक्षण के दौरान सिस्टम के प्रदर्शन और सभी तकनीकी मानकों का आकलन किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता और अत्याधुनिक सैन्य तकनीक विकसित करने की दिशा में बढ़ती ताकत को दर्शाती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और परियोजना से जुड़े उद्योग साझेदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि TARA का सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को नई मजबूती देगा और देश को रक्षा तकनीक के क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाएगा।

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