केंद्रीय ट्रेड संघों ने 28 और 29 मार्च को श्रम कानूनों में बदलाव और केंद्र के निजीकरण के फैसले के विरोध में भारत बंद का आह्वान किया है। यह बंद मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाया गया है। इस दौरान बैंकिंग, रोडवेज, बीमा और वित्तीय क्षेत्र पर इसका असर पडे़गा। ट्रेड यूनियनों द्वारा सोमवार यानी आज से दो दिवसीय हड़ताल के आह्वान का प्रभाव आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु और हरियाणा में दिख रहा है। यहां प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं, इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल और केरल में देखने को मिल रहा है। केरल में हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देश भी जारी किया है।
केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को दिया निर्देश
वहीं, केरल उच्च न्यायालय ने सरकार को राज्य सरकार के कर्मचारियों को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी भारत बंद में भाग लेने से मना करने का आदेश जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस भारत बंद को अवैध करार दिया है। जिसमें राज्य सरकार के कर्मचारी भाग ले रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में ये है स्थिति
पश्चिम बंगाल में बंद का असर साफ दिख रहा है। यहां वाम मोर्चे के सदस्य कोलकाता के जादवपुर रेलवे स्टेशन पर भारी संख्या में इकट्ठा हुए और रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर दिया।
ममता सरकार ने किया भारत बंद का विरोध
बंगाल की ममता सरकार ने इस भारत बंद का विरोध किया है। सरकार ने 28 और 29 मार्च को किसी भी कर्मचारी को कोई आकस्मिक अवकाश या आधे दिन की छुट्टी देने से साफ मना किया है। सरकार ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी छुट्टी लेता है, तो इसे आदेश का उल्लंघन माना जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय मजदूर संघ नहीं ले रहा भाग
वहीं, भारतीय मजदूर संघ ने इस हड़ताल में भाग लेने से मना कर दिया है। भारतीय मजदूर संघ ने कहा है कि वे हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। संघ ने इस भारत बंद राजनीति से प्रेरित बताया है। मजदूर संघ के मुताबिक इस बंद का मकसद कुछ राजनीतिक दलों के एजेंडे को आगे बढ़ाना है।