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केरल हाईकोर्ट: नीलांबुर-नंजनगुड प्रोजेक्ट पर रेलवे को सख्त निर्देश, बुनियादी ढांचों पर राज्य को क्या कहा गया?

Fri, 09 Oct 2026 12:54 PM IST
अमन मौर्या पीटीआई, कोच्चि, केरलम

सार

केरल हाई कोर्ट ने रेलवे को 14 अक्तूबर तक नीलांबुर-नंजनगुड रेल लाइन की डीपीआर और हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अदालतों और आयोगों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने को भी कहा।
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केरल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केरल हाई कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया है कि वह केरल के नीलांबुर और कर्नाटक के नंजनगुड को जोड़ने वाली प्रस्तावित रेलवे लाइन के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) 14 अक्तूबर तक तैयार करे। चीफ जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी एम की बेंच ने रेलवे को यह भी निर्देश दिया कि वे 14 अक्तूबर को एक हलफनामा दाखिल करके बताएं कि क्या डीपीआर को मंजूरी और मंजूरी के लिए सक्षम अधिकारी के सामने रखा गया है या नहीं। यह आदेश कोझिकोड स्थित 'कैंसर एंड एलाइड एलमेंट रिसर्च (सीएआरई) फाउंडेशन' के चेयरमैन की याचिका पर आया, जो एमवीआर कैंसर सेंटर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट चलाता है।
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सीएआरई के चेयरमैन ने क्या दावा किया?
सीएआरई के चेयरमैन सी एन विजयकृष्णन ने याचिका में दावा किया है कि मालाबार क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी की जरूरत है, लेकिन उनके कई बार कहने के बावजूद अधिकारियों ने इस पर कोई विचार नहीं किया। इसके बाद, इस साल जुलाई में, दक्षिण रेलवे ने एक हलफनामा दाखिल किया था जिसमें कहा गया था कि रेलवे बोर्ड ने नीलांबुर-नंजनगुड रेलवे प्रोजेक्ट के लिए 'फाइनल लोकेशन सर्वे' (एफएलएस) करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत, एफएलएस के लिए जरूरी लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग सर्वे और ट्रैफिक सर्वे किया जा रहा है और डीपीआर तैयार की जा रही है, पूरी होने पर इसे रेलवे बोर्ड के पास विचार के लिए भेजा जाएगा।
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प्रोजेक्ट पर रेलवे ने कोर्ट को क्या बताया?
रेलवे ने कोर्ट को यह भी बताया कि नीलांबुर-नंजनगुड रेलवे प्रोजेक्ट का काम सक्षम अधिकारी द्वारा प्रोजेक्ट को मंजूरी और मंजूरी मिलने पर ही शुरू हो पाएगा। बेंच ने कहा, 'हलफनामा 27 जुलाई, 2026 को दाखिल किया गया था। हमें उम्मीद है कि अब तक डीपीआर तैयार हो गई होगी और अगर नहीं, तो इसे अगली तारीख (14 अक्तूबर) तक तैयार कर लिया जाना चाहिए और हलफनामे के रूप में इस कोर्ट के सामने पेश किया जाना चाहिए। हलफनामे में यह बताया जाना चाहिए कि क्या नीलांबुर-नंजनगुड रेलवे प्रोजेक्ट की मंजूरी और मंजूरी के लिए डीपीआर को सक्षम अधिकारी के सामने रखा गया है या नहीं।'

बुनियादी ढांचों पर कोर्ट ने सरकार को क्या निर्देश दिया?
अदालतों, ट्रिब्यूनल और आयोगों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचों पर भी केरल हाई कोर्ट ने टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को यह पक्का करना होगा कि सभी अदालतों, ट्रिब्यूनल और आयोगों को उनके सुचारू कामकाज के लिए जरूरी बुनियादी ढांचागत सुविधाएं समय पर मिलें। चीफ जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी.एम. की बेंच ने यह बात तब कही जब उन्होंने सरकार को निर्देश दिया कि वह वित्त विभाग को सभी जानकारी दे जिससे कि केरल के सभी जिलों में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों में नए पद बनाए जा सकें।
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कोर्ट ने निर्देश दिया कि ये विवरण 7 अक्तूबर (आदेश की तारीख) के तीन हफ्तों के भीतर दिए जाएं, क्योंकि आयोगों को बुनियादी ढांचे से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और कर्मचारियों व बुनियादी ढांचे की कमी के कारण उनके आदेशों पर अमल नहीं हो पा रहा है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि 'राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग और जिला आयोगों के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण' की योजना के लिए 5 अक्तूबर, 2026 को एक करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी जारी की गई थी। सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि नए पद बनाने के लिए, उपभोक्ता आयोगों में 229 पद बनाने का प्रस्ताव शुरू किया गया है और यह सरकार के स्तर पर विचाराधीन है।
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