केरल के स्वास्थ्य क्षेत्र की दुनिया भर की बेहतरीन प्रणालियों से तुलना की जाती है। हालांकि, अलाप्पुझा मेडिकल कॉलेज में एक मरीज के पेट में कैंची छोड़ने का मामला सामने आने के बाद से जनता में रोष साफ नजर आ रहा है।
वर्षों से केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को शेष भारत के लिए एक मॉडल के रूप में प्रदर्शित किया जाता रहा है। इसे कुशल, सुलभ मानने के साथ ही इसकी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों से तुलना की जाती है। पत्रकार से विधायक बनीं और राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बार-बार दावा किया है कि राज्य के स्वास्थ्य सेवा मानक वैश्विक मानकों के बराबर हैं।
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हालांकि, यह बयानबाजी दर्दनाक रूप से तब खोखली लगने लगती है, जब किसी मरीज के पेट के अंदर सर्जिकल कैंची छोड़ दी जाती है। शुक्रवार को ऐसा ही एक नया मामला सामने आया। ऐसे ही एक मामले की बुजुर्ग पीड़िता ने एक बार फिर अपना दर्दनाक साझा किया।
पहले भी केरल में हो चुकी है ऐसी घटना
कोझिकोड की एक गृहिणी हर्षिना ने सरकारी अस्पताल में सर्जरी कराई थी। इस दौरान उनके पेट में सर्जिकल कैंची छोड़ दी गई थी और वह कई वर्षों तक उनके पेट में ही रही। उन्होंने अलाप्पुझा मेडिकल कॉलेज में इसी तरह की घटना की शिकार महिला के प्रति एकजुटता जताई। हालांकि बाद में उनकी कैंची निकाल दी गई थी, लेकिन वह कहती है कि आज भी उन्हें न्याय नहीं मिला है।
उन्होंने कहा, 'स्वास्थ्य मंत्री हर बार वही बात दोहराती हैं: गंभीर मामला, जांच, कड़ी कार्रवाई। लेकिन मैं अब भी न्याय के लिए लड़ रही हूं।' उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर जांच, निलंबन, कड़ी चेतावनी के बयान अब पहले से ही पता होते हैं। जब भी कोई चौंकाने वाली चूक सामने आती है, तो प्रतिक्रिया एक तय स्क्रिप्ट के अनुसार ही होती है।
विपक्षी नेता बोले- वेंटिलेटर सपोर्ट पर स्वास्थ्य क्षेत्र
ताजा मामले पर विपक्ष के नेता वीडी सतीशन का तर्क है कि बयानों से परे, केरल का स्वास्थ्य क्षेत्र वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। अलाप्पुझा में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन सरकार की उदासीनता के प्रति बढ़ते जन आक्रोश को रेखांकित करते हैं।