केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केरल राजभवन को सूचित किया है कि राज्यपाल और केरल राजभवन को जेड प्लस सिक्योरिटी देने का फैसला किया गया है। यह जानकारी ऐसे वक्त सामने आयी है, जब शनिवार को एसएफआई कार्यकर्ताओं ने फिर से राज्यपाल को काले झंडे दिखाए, जिससे नाराज होकर राज्यपाल सड़क किनारे ही धरने पर बैठ गए थे। राज्यपाल ने धरने से उठने से इनकार कर दिया था और आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा एसएफआई कार्यकर्ताओं को संरक्षण दिया जा रहा है।
राज्यपाल ने पुलिस पर लगाए आरोप
शनिवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान एक कार्यक्रम में शामिल होने कोट्टरकारा जा रहे थे। जब उनका काफिला कोल्लम के निलामेल से गुजर रहा था, तभी सीपीआईएम की छात्र शाखा एसएफआई के कार्यकर्ताओं ने उन्हें विरोध स्वरूप काले झंडे दिखाए। इससे राज्यपाल इस कदर नाराज हो गए कि तुरंत गाड़ी से निकले और सड़क किनारे ही धरने पर बैठ गए। राज्यपाल ने सड़क किनारे स्थित एक दुकानदार से कुर्सी मांगी और वहीं पर धरने पर बैठ गए। राज्यपाल का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह पुलिस अधिकारियों के प्रति नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे हैं। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा एसएफआई कार्यकर्ताओं को संरक्षण दिया जा रहा है और पुलिस उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही। राज्यपाल के धरने पर बैठने से वहां हंगामे की स्थिति बन गई।
राज्यपाल ने सीएम पर लगाए आरोप
राज्यपाल ने सीएम पिनरई विजयन पर राज्य में अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। करीब दो घंटे तक राज्यपाल धरने पर बैठे रहे और तभी वहां से रवाना हुए, जब पुलिस ने उन्हें 17 एसएफआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी दिखाई। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए राज्यपाल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।
राज्यपाल ने सीएम पर आरोप लगाते हुए कहा कि वही इन कानून तोड़ने वालों को बचा रहे हैं और पुलिस को इनके खिलाफ कार्रवाई करने से रोक रहे हैं। एसएफआई के प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ कई कानूनी मामले कोर्ट में लंबित हैं। राज्यपाल ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सीएम का काफिला गुजरता है तो क्या तब भी पुलिस प्रदर्शनकारियों को सड़क किनारे खड़े रहने की इजाजत देती है? राज्यपाल ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार पर हमले की कोशिश की।
मुख्यमंत्री बोले- राज्यपाल का वाहन से उतरना सुरक्षा प्रोटोकॉल के खिलाफ
वहीं, मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने कहा कि राज्यपाल खान का वाहन से उतरना सुरक्षा प्रोटोकॉल के खिलाफ है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल बार-बार लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत रुख अपना रहे हैं। राज्यपाल की सुरक्षा को सीआरपीएफ को सौंपे जाने को विजयन ने 'अजीब' बताया। उन्होंने कहा, आरिफ मोहम्मद खान अब तक ऐसे समूह का हिस्सा रहे हैं, जिसमें अब तक आरएसएस के कुछ कार्यकर्ता शामिल हैं, जिन्हें केंद्र की ओर से विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है। विजयन ने कहा, किसी भी स्थिति में अधिकार कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून सर्वोच्च है। मुख्यमंत्री कोल्लम जिले के निलामेल में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे।
मैंने कभी अतिरिक्त सुरक्षा नहीं मांगी: राज्यपाल
वहीं, जेड प्लस सुरक्षा कवर पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि मैंने कुछ नहीं मांगा है। मैं बल्कि केरल पुलिस की तारीफ कर रहा हूं। मैंने कभी अतिरिक्त सुरक्षा नहीं मांगी। यह केंद्र सरकार का अपना फैसला है।
राज्य के शिक्षामंत्री ने घटना को बताया खान का ‘चौथा तमाशा’
राज्य के शिक्षामंत्री वी शिवनकुट्टी ने इस घटना को राज्यपाल का ‘चौथा तमाशा’ करार दिया। उन्होंने कहा, पहला तमाशा तब हुआ जब वह तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे के रास्ते में अपने वाहन से बाहर निकले, जब एसएफआई कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए। दूसरा तमाशा वह था जिस तरह से उन्होंने विधानसभा में सरकार के पारंपरिक नीतिगत संबोधन का समापन किया। तीसरा तमाशा, राज्य की राजधानी के सेंट्रल स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उनका आचरण था। चौथा जो आज हुआ। शिवनकुट्टी ने कहा कि देश के किसी भी राज्य के राज्यपाल ने इस तरह का व्यवहार नहीं किया है।
कई मुद्दों पर आमने-सामने हैं सरकार और राज्यपाल
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और केरल की सीपीआईएम सरकार कई मुद्दों पर आमने-सामने है। राज्य के विश्वविद्यालयों के कामकाज और कई विधेयकों पर राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर नहीं करने का मामला चल रहा है, जिनके चलते कई बार सीपीआईएम की छात्र शाखा एसएफआई के कार्यकर्ता राज्यपाल को काले झंडे दिखा चुके हैं। बीते गुरुवार को केरल विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत में भी राज्यपाल ने महज कुछ मिनटों में ही अपना अभिभाषण समाप्त कर दिया था और अभिभाषण का सिर्फ आखिरी पैरा पढ़कर विधानसभा से चले गए थे। इसे लेकर भी सरकार और विपक्ष ने राज्यपाल की आलोचना की थी।