फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केरल: पायलट की सूझ-बूझ ने बचाई 26 की जान, एक चूक से 3 सेकेंड में हेलिकॉप्टर हो जाता तहस-नहस

Mon, 20 Aug 2018 04:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
keral rain - फोटो : pti
विज्ञापन
केरल में आई बाढ़ ने कइयों की जिंदगी लील ली है। बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं एनडीआरएफ की टीम और प्रशासन। लोगों को विकट स्थिति में बचाए जाने के कई मामले सामने भी आए, जिसमें बच्चे को मकान की छत से बचाने का मामला मीडिया में छाया रहा। डूबते हुए लोगों को बचाने में अहम भूमिका  निभाने वाले पायलट ने अपने रोमांचक अनुभव शेयर किए हैं।  
विज्ञापन


केरल में नाटकीय तरीके से एक इमारत की छत से 26 लोगों को बचाने वाले सीकिंग हेलीकॉप्टर से लोगों बचाने वाले लेफ्टिनेंट कमांडर अभिजीत गरुण ने बताया कि  बचाव कार्य के दौरान जरा सी भी चूक हेलिकॉप्टर को कई टुकड़ों में बिखेर देती और इसमें महज तीन सेकेंड लगते।

इस रोमांचकारी बचाव अभियान का अनुभव साझा करते हुए पायलट लेफ्टिनेंट कमांडर अभिजीत गरुण ने कहा ‘रूफटॉप लो होवर इन ए लाइट ऑन व्हील्स’ (छत पर लैंडिंग का तकनीकी नाम)  के बाद यानी छत के बहुत करीब पहुंचकर हेलीकॉप्टर करीब आठ मिनट तक मंडराता रहा और फिर अभियान को अंजाम देने के बाद उसने उड़ान भरी।
विज्ञापन
विज्ञापन

keral rain
लेफ्टिनेंट कमांडर अभिजीत गरुण ने कहा, ‘मुझे ‘लाइट ऑन व्हील्स’ के लिए फैसला करना पड़ा जहां हेलीकॉप्टर का पूरा वजन छत पर नहीं डाला जाता। क्योंकि ऐसा होने पर छत धंस सकती है।’ 

केरल के बाढ़ग्रस्त चालाकुडी कस्बे में शुक्रवार को नौसेना के सीकिंग 42 बी हेलीकॉप्टर के इस रोमांटक अभियान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और इसे हजारों ‘हिट’ मिले हैं। चार लोगों को बचाने के बाद 22 अन्य लोगों को भी उठाना एक कठिन काम था और चालक दल के सदस्यों ने उक्त प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया।

जब पायलट से पूछा गया कि कोई भी चूक होने पर क्या होता, इस पर 33 वर्षीय पायलट ने कहा, ‘हेलीकॉप्टर को पूरी तरह चकनाचूर होने में महज तीन से चार सेकेंड लगते। यह मेरे लिए मुश्किल फैसला था। मुझे खुशी है कि हमने सही फैसला किया।’ 

उन्होंने कहा, ‘यह पायलट के उचित फैसले का उत्कृष्ट उदाहरण है।’बचाये गये लोगों में 80 साल के एक बुजुर्ग शामिल हैं जिन्हें कुछ सामान के साथ चालाकुडी से कोच्चि में नौसैनिक अड्डे आईएनएस गरुण पर पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि टीम वर्क और सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल से यह अभियान संभव हो सका।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें