पेशे से शिक्षक जी. संदीप को पुलिस इलाज के लिए कोट्टारक्कारा के तालुक अस्पताल ले गई थी। संदीप ने खुद 112 नंबर पर कॉल कर अपनी जान को खतरा बताया था। जब पुलिस उसे घायल अवस्था में अस्पताल लाई, तो वहां ड्रेसिंग रूम में अचानक वह हिंसक हो गया।
Vandana Das Murder Case: डॉक्टर वंदना दास की नृशंस हत्या के मामले में केरल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोल्लम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी जी. संदीप को उम्रकैद की सजा सुनाई। फैसले की खास बात यह है कि संदीप को पहले अन्य अपराधों के लिए 30 साल की सजा काटनी होगी। इसके बाद ही उम्रकैद की सजा शुरू होगी।
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क्या है पूरा मामला?
यह घटना वर्ष 2023 की है। वंदना दास की हत्या ने केरल ही नहीं बल्कि पूरे भारत के डॉक्टरों को झकझोर कर रख दिया था। पेशे से शिक्षक जी. संदीप को पुलिस इलाज के लिए कोट्टारक्कारा के तालुक अस्पताल ले गई थी। संदीप ने खुद ही 112 नंबर पर कॉल कर अपनी जान को खतरा बताया था। जब पुलिस उसे घायल अवस्था में अस्पताल लाई, तो वहां अचानक वह हिंसक हो गया।
संदीप ने ड्रेसिंग रूम के मेज पर रखे सर्जिकल कैंची को हथियार बनाया और अंधाधुंध हमला शुरू कर दिया। उसने सबसे पहले साथ आए पुलिसकर्मियों पर हमला किया। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात युवा डॉक्टर वंदना दास भाग नहीं सकीं। संदीप ने उन पर कैंची से कई वार किए। बुरी तरह घायल वंदना को तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वो मौत को मात नहीं दे पाई।
अदालत में कही गई खास बातें
विशेष लोक अभियोजक प्रताप जी. पडिक्कल ने कहा कि कोर्ट ने संदीप को हत्या, साक्ष्य मिटाने और गलत तरीके से रोकने जैसी आईपीसी की कई धाराओं के तहत दोषी पाया है। इसके साथ ही, उसे 'केरल स्वास्थ्य सेवा व्यक्ति और स्वास्थ्य सेवा संस्थान अधिनियम 2012' के तहत भी दोषी करार दिया गया है।
न्यायालय ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सजा इतनी कठोर हो कि समाज में एक संदेश जाए। अदालत के आदेश के अनुसार, संदीप को पहले 30 साल जेल काटनी होगी। यह सजा उसके पहले के अपराधों के लिए होगा। इसके बाद उसकी वास्तविक उम्रकैद की सजा शुरू होगी।
एक होनहार जीवन का असमय अंत
डॉक्टर वंदना दास कोट्टायम जिले के कडुथुरुथी की रहने वाली थीं। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं। डॉक्टर वंदना अजीजिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हाउस सर्जन के साथ ट्रेनिंग के दौरान तालुक अस्पताल में सेवा दे रही थीं। उनकी मौत के बाद केरल में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे।