केरल के एर्नाकुलम में एक बेकरी संचालक से 'हलाल' का स्टीकर जबरन हटवाया गया। इस मामले में हिंदू एक्य वेदी संस्था का नाम सामने आया, जिसके बाद चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
यह है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, संस्था की परक्कदावु इकाई के अध्यक्ष अरुण अरविंद और सचिव धनेश प्रभाकरण के हस्ताक्षर वाला एक पत्र 28 दिसंबर 2020 को बेकरी संचालक को मिला था। आरोप है कि इस पत्र में हलाल के निशान को प्रकृति से भेदभाव और धर्म के नाम पर अलग भोजन करार दिया था, जो कि कानूनी रूप से गलत है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ नोटिस
बता दें कि इस मामले में पुलिस ने अरविंद समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया। इसके बाद हिंदूवादी संस्था की ओर से भेजा गया नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि, चारों कार्यकर्ताओं को जमानत पर छोड़ दिया गया है।
ईसाइयों ने भी जताया था विरोध
गौरतलब है कि साल 2019 में क्रिसमस के दौरान केरल के ईसाइयों ने हलाल मांस का विरोध किया था। उस वक्त हिंदू एक्य वेदी संस्था ने उनका समर्थन किया था। उनका कहना था कि केरल में हिंदुओं को हलाल मांस बेचने के लिए मजबूर किया जाता है।
क्रिश्चियन असोसिएशन ने भी की थी अपील
बता दें कि इस मामले में क्रिश्चियन असोसिएशन चर्च के ऑक्जिलरी फॉर सोशल एक्शन ने ईसाइयों से एक अपील भी की थी। इसमें कहा गया था कि हलाल मांस को उन खाद्य पदार्थों के रूप में नहीं खरीदा जाना चाहिए, जो उनके धार्मिक लोकाचार के खिलाफ हैं। इस मामले में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। इसके तहत राज्य में मुस्लिमों की मीट शॉप का बहिष्कार किया गया था।
नगर निगम ने किया था यह ऐलान
गौरतलब है कि दिसंबर 2020 के दौरान भाजपा के नेतृत्व वाली दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने ऐलान किया था कि वह इस मामले को लेकर एक योजना बना रही है। इसके तहत निगम क्षेत्र में आने वाले रेस्तरां और मीट शॉप को अनिवार्य रूप से बताना होगा कि वे जो मांस बेच रहे हैं वह झटका है या हलाल। भगवा पार्टी का कहना था कि यह प्रस्ताव उपभोक्ताओं की मदद के लिए तैयार किया गया था, जिससे उन्हें अपनी पसंद की दुकानों को चुनने में आसानी हो।