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केरल चुनाव में क्या खास: पार्टी नहीं यहां गठबंधन से तय होती है किस्मत, बड़े चेहरे कहां से मैदान में? जानें

Thu, 09 Apr 2026 11:05 AM IST
Kirtivardhan Mishra स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

केरल में आज विधानसभा चुनाव के लिए मतदान है। सुबह 7 बजे से वोटिंग चल रही है। यहां कौन-कौन से ऐसे मुद्दे हैं, जिनके आधार पर जनता वोट करेगी, आइए जानते हैं।
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केरल विधानसभा चुनाव 2026। - फोटो : अमर उजाला/AI
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विस्तार
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केरल, असम और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार आज मतदान है। केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए गुरुवार सुबह सात बजे से वोटिंग शुरू हुई। सुबह नौ बजे तक राज्य में 16 फीसदी से ज्यादा मतदान हो चुका था। इस बार केरल चुनाव में 883 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 375 राष्ट्रीय दलों से, 81 राज्य की पार्टियों से, 145 गैर-पंजीकृत दलों से और 282 निर्दलीय उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। 
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केरल में चुनाव से जुड़ी अहम तारीखें?
केरल में एक चरण में मतदान

केरल में कितने मतदाता और मतदान केंद्र?
चुनाव आयोग के अनुसार, 2026 के केरल विधानसभा चुनाव में कुल 2,71,42,952 (लगभग 2.71 करोड़) मतदाता मतदान करने के योग्य हैं। 

कुल मतदाता: 2,71,42,952
पुरुष मतदाता:  1,32,20,811
महिला मतदाता: 1,39,21,868
थर्ड जेंडर मतदाता: 273

केरल चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, इस बार राज्य में कुल 25 हजार 147 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। 

केरल में इस बार खास चेहरे-मुकाबले कौन से?

2026 के केरल विधानसभा चुनाव में कई प्रमुख चेहरे और बेहद दिलचस्प मुकाबले देखने को मिल रहे हैं, खासकर मध्य केरल (एर्नाकुलम, इदुक्की, कोट्टायम और अलप्पुझा) में जहां चुनाव केवल पार्टी के गणित के बजाय चेहरों और व्यक्तिगत वफादारी पर केंद्रित हो गया है। 

पिनरई विजयन: केरल के मौजूदा मुख्यमंत्री और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) गठबंधन के प्रमुख नेता विजयन अपनी पारंपरिक धर्मदम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

वीडी. सतीशन: विपक्षी गठबंधन  के मुख्य नेता और कांग्रेस के प्रमुख चेहरे सतीशन परवूर सीट से चुनावी मैदान में हैं। वे राहुल गांधी के साथ चुनाव प्रचार अभियान में जोर-शोर से जुड़े रहे हैं, ताकि मध्य केरल में ज्यादा सीटें जुटाई जा सकें।

राजीव चंद्रशेखर और के. सुरेंद्रन: ये दोनों भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के बड़े चेहरे हैं। राजीव चंद्रशेखर नेमोम से और के. सुरेंद्रन मंजेश्वरम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

जी. सुधाकरन: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से बगावत कर निर्दलीय ही अंबलप्पुझा सीट से चुनाव में हैं। उनका मुकाबला माकपा के एच. सलाम से है, जो कभी खुद सुधाकरन का चुनाव प्रचार संभालते थे। मजेदार बात यह है कि यहां से यूडीएफ ने अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है और सुधाकरन को ही समर्थन दे दिया है। 

केरल में पिछले चुनाव के क्या नतीजे थे?

केरल में पिछले विधानसभा चुनाव 6 अप्रैल 2021 में आयोजित किए गए थे और इसके नतीजे 2 मई 2021 को घोषित किए गए थे। 

एलडीएफ की ऐतिहासिक जीत: सत्ताधारी माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ गठबंधन ने 140 में से 99 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में दोबारा वापसी की थी।  यह संख्या उनके पिछले चुनाव की तुलना में आठ सीटें ज्यादा थी।

यूडीएफ का प्रदर्शन: कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन (यूडीएफ) को 41 सीटों पर जीत मिली, जो उनके पिछले चुनाव के प्रदर्शन से छह सीटें कम थीं।

एनडीए का खराब प्रदर्शन: भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को इस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी और उनका वोट शेयर भी पहले से घट गया था।

केरल में इस चुनाव के क्या मुद्दे?

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में राजनीतिक दलों की ओर से विकास, लोकलुभावन वादों, स्थानीय भावनाओं और व्यक्तिगत चेहरों को मुख्य मुद्दा बनाया गया है। 

विकास और कल्याणकारी वादे: सत्ताधारी एलडीएफ गठबंधन ने अपने चुनाव प्रचार का मुख्य केंद्र  विकास को बनाया है और इसके लिए राज्य के उत्तरी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में विकास प्रगति मार्च निकाले हैं। दूसरी ओर, विपक्षी यूडीएफ गठबंधन ने कई बड़े चुनावी वादे किए हैं, जिनमें कॉलेज जाने वाली लड़कियों को 1,000 रुपये प्रति माह का भत्ता, 3,000 रुपये की सामाजिक कल्याण पेंशन, युवाओं को रोजगार के लिए पांच लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण, केएसआरटीसी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा और हर परिवार के लिए 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर (ओमन चांडी स्वास्थ्य बीमा) शामिल है।
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विदेशी अंशदान (एफसीआरए) संशोधन विवाद: विदेशी अंशदान (विनियमन) ढांचे में किए गए संशोधनों पर विवाद भी एक अहम मुद्दा है। चर्च समूहों ने इन संशोधनों की आलोचना की है। इसके जवाब में भाजपा उम्मीदवार शोन जॉर्ज ने बचाव करते हुए कहा है कि इससे केवल उन्हीं लोगों को चिंता करने की जरूरत है जिन्हें विदेशों से अवैध धन प्राप्त हुआ है।

सत्ता विरोधी लहर और गुटबाजी: उदुंबनचोला जैसी कुछ सीटों पर विपक्षी यूडीएफ उम्मीदवार माकपा के अंदर चल रहे कथित आंतरिक असंतोष और सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। कई चुनाव प्रचारों में भी यूडीएफ नेताओं ने इस एंटी-इन्कंबेंसी को भुनाने की कोशिश की है।

मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए एलडीएफ ने मट्टारुंडु एलडीएफ अल्लाथे (एलडीएफ के अलावा और कौन?) और यूडीएफ ने केरलम जयिक्कुम, यूडीएफ नायिक्कुम (केरल जीतेगा, यूडीएफ नेतृत्व करेगा) जैसे नारे दिए हैं। वहीं, एनडीए ने बदलाव की अपील करते हुए मरथथु इनी मारुम (जो नहीं बदला, वो अब बदलेगा) का नारा दिया है।

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