केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने कहा कि कन्नूर जिले में पिछले पांच-छह वर्षों में सैकड़ों विस्फोट हुए हैं। हमने इस मुद्दे को सदन के पटल पर लाने की कोशिश की और कहा कि सीपीएम, आरएसएस, एसडीपीआई और कुछ चरमपंथी संगठन बम बना रहे हैं, सीपीआईएम इन लोगों को प्रायोजित कर रहा है और उनकी रक्षा कर रहा है।
इससे पहले आरएसएस पर टिप्पणी को लेकर सोमवार को एक स्थानीय अदालत ने कांग्रेस नेता वीडी सतीशन के खिलाफ नोटिस जारी किया था। उन्होंने कथित तौर पर संगठन के विचारक एम.एस.गोलवलकर के खिलाफ टिप्पणी की थी। उन्हें 12 अगस्त को अदालत में पेश होने को कहा गया है।
'बंच ऑफ थॉट्स' की सामग्री से की पूर्व मंत्री के भाषण की तुलना
आरएसएस के एक पदाधिकारी केके बलराम ने उनके खिलाफ मामला दायर करवाया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया गया था कि सतीसन ने राज्य के पूर्व मंत्री साजी चेरियन के भाषण की तुलना गोलवलकर की किताब 'बंच ऑफ थॉट्स' की सामग्री से की।
किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामने करने को तैयार हूं : सतीसन
इससे पहले 9 जुलाई को सतीसन ने आरएसएस द्वारा जारी कानूनी नोटिस को खारिज कर दिया था और कहा कि वह इस मामले पर किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा था, "मैंने किताब के पेज नंबर का हवाला देते हुए बयान दिया है।" चेरियन ने बुधवार को अपनी विवादास्पद टिप्पणी को लेकर विपक्ष सहित विभिन्न हलकों की आलोचना के बीच अपने इस्तीफे की घोषणा की थी।
केरल हाईकोर्ट ने 13 आरएसएस कार्यकर्ताओं को किया बरी
केरल हाईकोर्ट ने 2008 में तिरुवनंतपुरम में माकपा के एक कार्यकर्ता की हत्या के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 13 कार्यकर्ताओं को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश नहीं कर सका। जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस सी. जयचंद्रन की पीठ ने आरएसएस के कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराने के सत्र अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपील विचार के लिए मंगलवार को मंजूर कर ली।
पीठ ने आदेश में कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता साजिश, द्वेष और छल अक्सर नफरत फैलाती है जिसका नतीजा बिना सोचे-समझे रक्तपात के रूप में सामने आ रहा है। पीठ ने कहा, जिस तरीके से अदालत के सामने घटनाक्रम पेश किए गए, उससे एक मनगढ़ंत कहानी को परिभाषित करने के लिए गवाहों को सिखाने-पढ़ाने व सबूत एकत्रित करने की सोची-समझी कोशिश नजर आती है। पीठ ने कहा, हम आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी करते हैं, अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ अपराधजन्य परिस्थितियों को साबित करने में नाकाम रहा है।
उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर 2016 को तिरुवनंतपुरम में अतिरिक्त सत्र अदालत ने आरएसएस के 13 कार्यकर्ताओं को एक अप्रैल 2008 को माकपा कार्यकर्ता वीवी विष्णु की हत्या के संबंध में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने सभी 13 आरोपियों को माकपा कार्यकर्ता की हत्या का दोषी ठहराया था।