बयान के बाद पार्टी को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए केजरीवाल ने दलित मुद्दे का दांव चला। पंजाब में लगभग एक तिहाई आबादी दलित है। ऐसे में पार्टी को अब भी उम्मीद है कि दलित चेहरे हरपाल सिंह चीमा को पंजाब विधानसभा में विपक्षी दल का नेता बनाए जाने से उसे इसका लाभ मिलेगा। उसके इस फैसले का सकारात्मक असर दिल्ली की राजनीति में भी पड़ेगा क्योंकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को समर्थन देने वाला एक बड़ा वर्ग दलित समुदाय से ही आता है।
मनाने की कोशिश जारी
पार्टी सूत्रों के मुताबिक खैरा के विवादित बयान के बाद केजरीवाल उनसे बेहद खफा थे। उनकी नाराजगी दूर करने के लिए सुखपाल सिंह खैरा दिल्ली पहुंचे लेकिन केजरीवाल ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया। इसके बाद पार्टी में नंबर दो मनीष सिसोदिया ने उनसे मुलाकात की और उन्हें डांट-फटकार लगाई।
लेकिन खैरा पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और दो अगस्त को उन्होंने पार्टी के आठ विधायकों की अलग बैठक की जिसे पार्टी ने आप विरोधी कार्य करार दिया। अगर सुखपाल सिंह खैरा के साथ आठ विधायकों के साथ बाहर जाते हैं तो इससे पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। इसी कारण आप अभी भी उन्हें मनाने की कोशिश में जुटी हुई है।