कश्मीरी पंडित संगठनों ने जम्मू और कश्मीर में भारतीयों को भूमि खरीदने की अनुमति देने संबंधी केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया। इन संगठनों में रूट्स इन कश्मीर (आरआईके), जम्मू-कश्मीर विचार मंच (जेकेवीएम) और यूथ फॉर पनुन कश्मीर आदि संगठन शामिल हैं।
रूट्स इन कश्मीर की एक विज्ञप्ति के अनुसार, जेकेवीएम के अध्यक्ष दिलीप मट्टू ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय ने हमेशा भारतीयों के अधिकारों को किसी भी समुदाय या क्षेत्रीय आकांक्षाओं से ऊपर रखा है। उन्होंने कहा कि हमने पलायन चुना है लेकिन राष्ट्र की एकता और अखंडता पर कोई समझौता नहीं किया। आरआईके के प्रवक्ता राहुल महानूरी ने कहा कि कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ने वाले सैनिक भारत के अलग-अलग हिस्से से आते हैं और हजारों सैनिकों ने तो अपने प्राणों की आहुति दी है।
उन्होंने कहा कि यह अब तक अन्यायपूर्ण कदम था कि सुरक्षा के लिए तैनात जवान या शहीदों के परिवार वाले यहां जमीन नहीं खरीद सकते। एक्टिविस्ट नेत्री भट ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे वन नेशन, वन लॉ और वन रूल को स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय लोगों को फायदा होगा।