कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को लेकर काफी विवाद चल रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने लिंगायतों को अल्पसंख्यक धर्म का दर्जा देने का प्रस्ताव पास कर भाजपा के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। वहीं बड़ा चुनावी दांव खेला है। बता दें कि राज्य में 17 से 18 फीसदी आबादी लिंगायत समुदाय की है। इनका 100 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है। 224 में से 52 विधायक इसी समुदाय से हैं। इन्हें भाजपा का वोटबैंक माना जाता है।
राज्य में वोकालिगा की आबादी 12 फीसदी है। इनका 80 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है। पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा इसी समुदाय से हैं। उनकी पार्टी जेडीएस का इन पर काफी प्रभाव है। इस समुदाय से राज्य में 6 सीएम हुए हैं। अमित शाह, अनंत कुमार, सदानंद गौड़ा वोकालिगा के चुनचुनगिरी मठ भी जा चुके हैं।
कर्नाटक में मठों का वर्चस्व 80 दशक में शुरू हुआ। जब मठों ने आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाने के साथ सामाजिक और शैक्षणिक कार्य शुरू किए।
- 1. 1983 में पहली बार लिंगायत मठों ने जनता दल के रामकृष्ण हेगड़े का समर्थन किया। हालांकि जनता दल स्थायी सरकार देने में नाकाम रही।
- 2. 1987 में लिंगायत मठों ने कांग्रेस के वीरेंद्र पाटिल को सपोर्ट किया, पर वीरेंद्र को राजीव गांधी ने एयरपोर्ट पर ही सीएम पद से हटा दिया।
- 3. 2008 में लिंगायत मठों ने भाजपा के येदियुरप्पा को सपोर्ट किया। उनके सीएम पद से हटने के बाद 2013 के चुनावों में भाजपा को हार मिली।
कुरबा मठों ने 2013 के विधानसभा चुनाव में अपने समुदाय के सिद्दारमैया को समर्थन दिया था। तीसरा प्रमुख मठ कुरबा समुदाय का है और इसकी आबादी 8 फीसदी है। इसका मुख्य मठ श्रीगैरे, दावणगेरे में है। सीएम सिद्दारमैया इसी समुदाय से हैं। उनके वोट बैंक अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग, दलित) को तोड़ने की कवायद में अमित शाह चित्रदुर्ग में दलित मठ शरना मधरा गुरु पीठ गए थे।