सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या विधानसभा अध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देने का अधिकार है। 10 बागी विधायकों के इस्तीफों के मामले में फैसला करने का निर्देश देने के शीर्ष अदालत के गुरुवार के आदेश के खिलाफ कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष के. आर. रमेश की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह सवाल किया।
वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि इन बागी विधायकों की याचिका पर न्यायालय को विचार नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इन विधायकों ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं लेकिन इसके बावजूद उनका पक्ष सुने बगैर ही आदेश पारित किया गया।
धवन ने कहा कि बागी विधायकों में से एक विधायक पर पोंजी योजना में संलिप्त होने का आरोप है और इसके लिए ‘हमारे ऊपर आरोप लगाया जा रहा है’। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष को स्वंय को इस तथ्य के बारे में संतुष्ट करना होगा कि इन विधायकों ने स्वेच्छा से इस्तीफे दिए हैं।
उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने जब दूसरे पक्ष को सुने बगैर ही आदेश पारित कर दिया तो ऐसी स्थिति में अध्यक्ष क्या कर सकता है। विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल को याचिका की प्रति नहीं दी गई।