कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली ने गारंटी योजनाओं की समीक्षा की मांग के साथ कहा कि इन योजनाओं से अमीरों को बाहर रखने से राज्य के खजाने को सालाना कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी, जो पार्टी के चुनाव से पहले किया गया वादा था। पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री जारकीहोली ने कहा- कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इन्हें बंद कर देना चाहिए। लोग कह रहे हैं कि ये गारंटी गरीबों को दी जानी चाहिए, अमीरों को नहीं। होटलों में, कामगारों के बीच और हर जगह इस पर चर्चा हो रही है। लोक निर्माण मंत्री ने कहा, यहां तक कि विपक्ष भी पूछ रहा है, 'आप अमीरों को क्यों दे रहे हैं?' इसे गरीबों को दीजिए।
राज्य के बजट में 52 हजार करोड़ हुए थे आवंटित
बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस साल की शुरुआत में राज्य का बजट पेश करते हुए घोषणा की थी कि 2024-25 के दौरान पांच गारंटी योजनाओं के लिए 52 हजार करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। सिद्धारमैया ने कहा, पांच गारंटी योजनाओं के जरिए हम करोड़ों लोगों को 52 करोड़ रुपये दे रहे हैं। इन गारंटी योजनाओं के जरिए हर साल प्रत्येक परिवार को औसतन 50 हजार से 55 हजार रुपये हस्तांतरित किए जाते हैं।
कर्नाटक सरकार ने जो पांच गारंटी लागू की हैं उनमें - 'शक्ति' योजना के तहत गैर-लक्जरी सरकारी बसों में कर्नाटक की महिलाओं के लिए मुफ्त सवारी, 'गृह ज्योति' के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, बेरोजगार स्नातकों और डिप्लोमा धारकों के लिए 'युवा निधि' जिसमें दो साल के लिए 3,000 रुपये और 1,500 रुपये प्रति माह की पेशकश की जाती है, 'गृह लक्ष्मी' योजना जो बीपीएल परिवारों की महिला मुखिया को 2,000 रुपये देती है और 'अन्न भाग्य' योजना जिसमें प्रत्येक बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवार के सदस्य को 10 किलो मुफ्त खाद्यान्न दिया जाता है।
'योजना में संशोधन से लोकप्रियता पर नहीं पड़ेगा असर'
यह पूछे जाने पर कि क्या योजनाओं को संशोधित करने से सरकार की लोकप्रियता पर असर पड़ेगा, जारकीहोली ने कहा- उन्हें (गारंटी) कौन खत्म कर रहा है? हम इसे रोक नहीं रहे हैं, इसे एकदम से नहीं किया जा सकता, एक कैबिनेट और विधायक दल है, ये निर्णय उस स्तर पर लेने होंगे, मेरे स्तर पर नहीं, इस पर पार्टी को फैसला करना है।
गृह मंत्री ने टिप्पणी करने से किया इनकार
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह की चर्चाओं के लिए उनकी राय महत्वपूर्ण नहीं है और कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिए जाते हैं। परमेश्वर ने कहा, अगर हम व्यक्तियों की राय लेते रहेंगे तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इस पर कैबिनेट में फैसला होना चाहिए। अगर हम बाहर बात करेंगे तो इससे भ्रम की स्थिति पैदा होगी।
भाजपा ने राज्य सरकार पर साधा निशाना
वहीं मंत्री जारकीहोली के बयान पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार मुफ्त सुविधाओं का बोझ उठाने में असमर्थ है क्योंकि उसके पास ऐसा करने के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, इस पृष्ठभूमि में, यह आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए कि कांग्रेस के नेता, जिन्होंने मंत्रियों के माध्यम से गारंटियों के खिलाफ आपत्ति जताई है, न केवल इन गारंटियों को कम करने की कोशिश करते हैं, बल्कि उन्हें पूरी तरह से रोकते हैं। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि इन पांच गारंटियों का ऐसा ही हश्र होना तय था क्योंकि इन्हें कांग्रेस सरकार ने वित्तीय संसाधनों की गारंटी दिए बिना पेश किया था।