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Karnataka Hijab Row: कर्नाटक हिजाब मामले में आज भी नहीं आया फैसला, कल फिर होगी हाईकोर्ट में सुनवाई

Thu, 17 Feb 2022 04:11 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु

सार

कर्नाटक हिजाब विवाद को लेकर हाईकोर्ट में पांचवें दिन भी सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में अपनी दलील रखीं। आज इस पर कोई फैसला नहीं आया और सुनवाई कल भी जारी रहेगी। 
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हिजाब विवाद - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कर्नाटक हिजाब विवाद को लेकर हाईकोर्ट में पांचवें दिन की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं। हालांकि आज भी इस मामले पर कोई फैसला नहीं आया और अदालत में सुनवाई कल भी जारी रहेगी। 

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आज कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिकाओं में से एक को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता रहमतुल्ला कोतवाल से कहा कि आप इतने महत्वपूर्ण मामले में अदालत का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। 

वकील की दलील,  मुस्लिम लड़कियों का मानसिक स्वास्थ्य हो रहा प्रभावित
वहीं, इस मामले में एक याचिकाकर्ता अधिवक्ता विनोद कुलकर्णी, जिनकी याचिका विचाराधीन है, कर्नाटक हाईकोर्ट से कहा कि यह मुद्दा उन्माद पैदा कर रहा है और मुस्लिम लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कम से कम शुक्रवार को मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनने की अनुमति देने के लिए अंतरिम राहत की मांग की। 
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5 छात्राओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सीनियर वकील एएम डार ने कर्नाटक हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि हिजाब पर सरकार के आदेश से उनके मुवक्किलों पर असर पड़ेगा जो हिजाब पहनते हैं। उन्होंने कहा कि यह आदेश असंवैधानिक है। अदालत ने डार से अपनी वर्तमान याचिका वापस लेने और नई याचिका दायर करने को कहा। 

बुधवार को दी गई थीं ये दलीलें
इससे पहले इस मामले पर बुधवार को भी सुनवाई हुई थी। इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जिरह करते हुए अधिवक्ता रवि वर्मा कुमार ने कहा कि अकेले हिजाब का ही जिक्र क्यों है जब दुपट्टा, चूड़ियां, पगड़ी, क्रॉस और बिंदी जैसे सैकड़ों धार्मिक प्रतीक चिन्ह लोगों द्वारा रोजाना पहने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि मैं केवल समाज के सभी वर्गों में धार्मिक प्रतीकों की विविधता को उजागर कर रहा हूं। सरकार अकेले हिजाब को चुनकर भेदभाव क्यों कर रही है? चूड़ियां पहनी जाती हैं? क्या वे धार्मिक प्रतीक नहीं है? कुमार ने कहा, यह केवल उनके धर्म के कारण है कि याचिककर्ता को कक्षा से बाहर भेजा जा रहा है। बिंदी लगाने वाली लड़की को बाहर नहीं भेजा जा रहा, चूड़ी पहने वाली लड़की को भी नहीं। क्रॉस पहनने वाली ईसाइयों को भी नहीं, केवल इन्हें ही क्यों। यह संविधान के आर्टिकल15 का उल्लंघन है।

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