कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि किसी लेआउट के डेवलेपर और जमीन के मालिकों का जमीन पर नियंत्रण छोड़ने के बाद वहां बनी सड़कों पर कोई अधिकार नहीं होगा। कर्नाटक हाईकोर्ट ने एकल जज वाली पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए यह आदेश दिया। एकल जज पीठ ने 29 नवंबर 2022 को दिए अपने फैसले में कहा था कि गेटेड कम्युनिटी का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है और जमीन का डेवलेपर आम जनता को सड़क का इस्तेमाल करने से नहीं रोक सकता।
क्या है मामला
उपकार रेजीडेंसेस ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। यह याचिका श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वरा टावर्स के पब्बा रेड्डी कोडांडरामी रेड्डी के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें जमीन के मंजूर लेआउट में जनता के प्रवेश और निकास देने की मांग की गई थी। रेड्डी का कहना है कि यह एक गेटेड कम्युनिटी है और लेआउट में मौजूद सड़क का इस्तेमाल सिर्फ सोसाइटी के लोग ही कर सकते हैं। एकल जज पीठ ने अपने आदेश में सड़क को आम जनता के लिए खोलने का आदेश दिया। इस फैसले के खिलाफ रेड्डी ने डिविजन बेंच में अपील की। अब मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वाराले और जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की पीठ ने भी एकल जज पीठ के फैसले को बरकरार रखा है।
अपील को खारिज करते हुए खंडपीठ ने कहा कि जब लेआउट को मंजूरी दी गई तो उसमें शर्त थी कि लेआउट में मौजूद सड़कों का रखरखाव नगर निगम द्वारा किया जाएगा और ये सड़कें सभी आम नागरिकों के इस्तेमाल के लिए होगी। हालांकि कुछ मामलों में रियायत दी जा सकती है लेकिन एक बार सड़कें नगर निगम के नियंत्रण में आएंगी तो फिर डेवलेपर या जमीन के मालिक के पास कोई अधिकार नहीं होगा कि वह आम लोगों को सड़कों के इस्तेमाल के लिए रोक सकें।