कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख शिवकुमार ने राज्य सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए याचिका दायर कर कहा था कि सीबीआई जांच के लिए कर्नाटक सरकार का आदेश गलत है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस नटराजन की अगुवाई वाली एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की याचिका को खारिज कर दी। याचिका आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच से जुड़ी है। याचिका में उनके खिलाफ भाजपा नीत राज्य सरकार के केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से मामले की जांच कराने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
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कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख शिवकुमार ने राज्य सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए याचिका दायर कर कहा था कि सीबीआई जांच के लिए कर्नाटक सरकार का आदेश गलत है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस नटराजन की अगुवाई वाली एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी। 2019 में बीएस येदियुरप्पा सरकार ने डीके शिवकुमार के खिलाफ जांच की मंजूरी दी थी। उस समय सीबीआई ने राज्य सरकार की अनुमति से इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की थी।
कर्नाटक मिल्क फेडरेशन मामले पर आया फैसला
एक अन्य मामले में उच्च न्यायालय ने गुजरात की एक एजेंसी के माध्यम से कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) के 487 पदों पर भर्ती के लिए लगी रोक को हटा दिया है। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई थी।
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17 मार्च को विभिन्न पदों पर भर्ती पर अंतरिम रोक लगा दी थी
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वारले और जस्टिस एमएसजी कमल की खंडपीठ भर्ती को चुनौती देने वाली पांच दूध उत्पादक सहकारी सोसायटी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए भर्ती प्रक्रिया और अभ्यर्थियों की अंतिम सूची की घोषणा की अनुमति दे दी। इससे पहले कोर्ट ने 17 मार्च को विभिन्न पदों पर भर्ती पर अंतरिम रोक लगा दी थी।