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Karnataka: सरकारी ठेकों में मुस्लिमों को चार फीसदी कोटा, राज्यपाल ने विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा

Wed, 16 Apr 2025 10:06 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुसलमानों को सरकारी ठेकों में चार फीसदी आरक्षण देने वाले विधेयक को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने इस विधेयक को अपनी मंजूरी देने की बजाय राष्ट्रपति की अनुमति के लिए सुरक्षित रख लिया है। राजभवन सूत्रों के मुताबिक, यह विधेयक अब कर्नाटक की विधि और संसदीय कार्य विभाग के जरिए राष्ट्रपति को भेजा दिया गया है।
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कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, सीएम सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार - फोटो : ANI
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विस्तार
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कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सरकारी ठेकों में मुसलमानों को चार प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए सुरक्षित रख लिया है। राजभवन के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि राज्यपाल गहलोत ने विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए आरक्षित कर दिया और इसे कर्नाटक के विधि एवं संसदीय कार्य विभाग को भेज दिया। अब राज्य सरकार इस विधेयक को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजेगी।
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कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों से बिल पारित
बता दें कि, राज्य में भाजपा के विरोध के बावजूद कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों ने बिल पारित किया था। वहीं भाजपा ने इसे लेकर आरोप लगाया कि यह विधेयक अवैध है क्योंकि भारतीय संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण देने का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही आरोप लगाया कि इस विधेयक में सत्तारूढ़ कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति की बू आती है। पार्टी ने राज्य भर में चल रही अपनी जनआक्रोश यात्रा के दौरान इस विधेयक को प्रमुख मुद्दा बनाया है।
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राज्यपाल ने क्या कहा?
राज्यपाल गहलोत ने कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता, क्योंकि यह समानता (अनुच्छेद 14), गैर-भेदभाव (अनुच्छेद 15) और समान अवसर (अनुच्छेद 16) जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि आरक्षण केवल सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया जा सकता है, धर्म के आधार पर नहीं।' राज्यपाल ने अनुच्छेद 15 का हवाला देते हुए कहा कि संविधान धर्म, जाति, लिंग, नस्ल या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता।

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संवैधानिक अधिकार और राज्यपाल का निर्णय
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 200 और 201 के तहत उन्हें यह अधिकार है कि वे किसी भी विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए सुरक्षित रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह राज्यपाल का विशेषाधिकार है कि वह निर्णय ले कि कोई विधेयक तुरंत पारित हो या आगे राष्ट्रपति को भेजा जाए। उन्होंने कहा, 'कोई भी विधेयक तभी कानून बनता है जब राज्यपाल उसे मंजूरी दें या वह राष्ट्रपति से स्वीकृति प्राप्त कर ले। अगर कोई भ्रम या भविष्य में विवाद की संभावना हो, तो राज्यपाल उसे राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं।'

क्या है यह विधेयक?
यह विधेयक 'कर्नाटक ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योरमेंट्स (संशोधन) विधेयक, 2025' है, जिसे कांग्रेस सरकार ने 21 मार्च को विधानमंडल के दोनों सदनों में पारित किया था। इसका उद्देश्य था कि मुसलमानों को सरकारी ठेकों में 4 प्रतिशत आरक्षण मिले।

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