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SC: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, IMNS की पूर्व महिला अफसर की नियुक्ति पर मुहर; पूर्व सैनिकों के सम्मान पर जोर

Wed, 16 Apr 2025 10:03 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय सैन्य नर्सिंग सेवा (आईएमएनएस) की एक रिटायर्ड महिला अफसर की नौकरी के मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने पूर्व सैनिकों को लेकर कहा कि रक्षा बलों के सेवारत सदस्यों का मनोबल बनाए रखने के लिए पूर्व सैनिकों का प्रभावी पुनर्वास आवश्यक है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय सैन्य नर्सिंग सेवा (आईएमएनएस) की एक रिटायर्ड महिला अधिकारी की नौकरी के मामले में सुनवाई की। इस दौरान उच्च न्यायालय ने एक महिला पूर्व सैनिक को सरकारी नौकरी में नियुक्त करने का आदेश देते हुए कहा कि रक्षा बलों के सेवारत जवानों का मनोबल बनाए रखने के लिए पूर्व सैनिकों का सही तरीके से पुनर्वास बेहद जरूरी है। मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा और मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि अगर रिटायर्ड सैनिकों की अनदेखी की गई, तो भविष्य में युवा सेना में आने से हिचकिचा सकते हैं।

बता दें कि यह मामला भारतीय सैन्य नर्सिंग सेवा (आईएमएनएस) की एक रिटायर्ड महिला अफसर से जुड़ा था, जिसकी नौकरी के लिए दी गई अर्जी को पंजाब सरकार ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि वह 'पूर्व सैनिक' की श्रेणी में नहीं आतीं।

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हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका

हालांकि इससे पहले, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की एकल पीठ ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन बाद में हाईकोर्ट की बड़ी बेंच ने उन्हें राहत देते हुए कहा कि नियमों के मुताबिक आईएमएनएस से रिटायर्ड लोग भी पूर्व सैनिक के हकदार हैं और राज्य सरकार को उनकी नियुक्ति पर विचार करना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा हाईकोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि सशस्त्र बलों से रिटायर होने वाले लोग शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम होते हैं और नागरिक जीवन में उनका योगदान समाज के लिए फायदेमंद होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पंजाब से सेना में जाने वाले जवानों की संख्या लगभग 89,000 है, जो देश की सेना का 7.7% हिस्सा है, जबकि राज्य की आबादी पूरे देश में केवल 2.3% है।

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