कर्नाटक सरकार ने जांच के लिए गठित की एसआईटी (फाइल फोटो)
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कर्नाटक सरकार ने महर्षि वाल्मिकी जनजातीय विकास कॉरपोरेशन लिमिटेड में हुए अवैध धन हस्तांतरण के मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। चार सदस्यों वाली एसआईटी टीम का नेतृत्व बंगलूरू सीआईडी विभाग के आर्थिक अपराध के एडिश्नल डीजीपी मनीष खार्बिकर करेंगे। बता दें कि कॉरपोरेशन के अकाउंट सुपरिटेंडेंट चंद्रशेखर पी ने रविवार शाम को आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद इस मामले को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।
बैंक अधिकारी ने छोड़ा सुसाइड नोट
दरअसल कॉरपोरेशन बैंक के खाते से अवैध तरीके से 88.62 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम का हस्तांतरण किया गया था। बैंक के अकाउंट अधिकारी की आत्महत्या के बाद इस मामले का खुलासा हुआ। बैंक अधिकारी ने मरने से पहले एक नोट भी छोड़ा, जिसमें कॉरपोरेशन बैंक के निलंबित एमडी जे जी पद्मनाभ, अकाउंट अधिकारी परशुराम जी दुरुगन्नावार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य मैनेजर शुचिस्मिता रावल का नामों का जिक्र किया गया है। नोट में ये भी लिखा है कि मंत्री ने फंड हस्तांतरित करने का मौखिक आदेश दिया था।
भाजपा ने सरकार को घेरा
भाजपा ने इस मुद्दे पर सरकार को घेर लिया है और मामले की जांच की मांग की है। साथ ही भाजपा ने अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी नागेंद्र के इस्तीफे की भी मांग की है। भाजपा का आरोप है कि मंत्री नागेंद्र का इस घोटाले से सीधा संबंध है। दिवंगत बैंक अधिकारी चंद्रशेखर की पत्नी की शिकायत पर शिवमोगा के विनोबा नगर की पुलिस ने मामला दर्ज किया है, जिसके आधार पर सरकार ने जांच के लिए एसआईटी गठित की है। कॉरपोरेशन बैंक के जीएम ए राजशेखर पर बैंक के फंड का गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप लगा है।
विशेष जांच दल गठित
सरकार ने बयान में कहा है कि वे वित्तीय अनियमितता के इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रहे हैं और इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल बनाने का फैसला लिया गया है। विशेष जांच दल में तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। साथ ही राज्य के डायरेक्टर जनरल और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को भी सारे मामले एसआईटी को सौंपने का आदेश दिया गया है। सरकार ने एसआईटी को मामले की जांच रिपोर्ट डायरेक्टर जनरल एंड इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के द्वारा सरकार को सौंपने का आदेश दिया है।