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Karnataka : हनुमानजी की जन्मस्थली पर सियासत की जोरदार जंग, त्रिकोणीय मुकाबला, गंगावती में होगी असली लड़ाई

Mon, 17 Apr 2023 06:48 AM IST
देव कश्यप नितिन यादव, कोप्पल।

सार

भगवान हनुमान के जन्मस्थान को लेकर तमिलनाडु के दावे के बाद इस केंद्र को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने सौ करोड़ से ज्यादा की योजना बनाई है। इतना ही नहीं, इसमें से कुछ धन जारी करके काम भी शुरू कर दिया है।
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कोप्पल किला (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : Wikipedia
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विस्तार
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कर्नाटक का एक छोटा सा जिला है कोप्पल। चुनावी जंग में बड़े-बड़े नेताओं की सीटों के बीच यह जिला भी राजनीति की जोरदार जंग का हिस्सा बना हुआ है। यह माना जाता है कि भगवान हनुमान का जन्म किष्किंधा में अंजेयांद्री पर्वत पर हुआ था।

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हालांकि तमिलनाडु सरकार के अलावा कर्नाटक में ही गोकर्ण को लेकर भी ऐसा ही दावा किया जाता रहा है, लेकिन कर्नाटक सरकार ने इस स्थान को हनुमान जन्मस्थली के तौर पर विकसित करने का फैसला किया है। वैसे तो सभी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन विपक्षियों का यह भी मानना है कि पिछले कुछ समय में जिस तरह से कर्नाटक की भाजपा सरकार इसका प्रचार कर रही है, उसका मकसद सियासी भी है। अभी इस जिले की पांच सीटों में से तीन पर भाजपा और दो पर कांग्रेस का कब्जा है।

एक दौर में बेल्लारी बंधु के नाम से चर्चित रहे जनार्दन रेड्डी का अपनी खुद की पार्टी से इस जिले की एक सीट पर चुनाव लड़ने से मुकाबला रोचक भी हो गया है। स्थानीय पत्रकारों का यह भी कहना है कि इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व तो बहुत सालों से है, लेकिन कुछ समय में मंदिर जाने वालों में सियासी लोगों की संख्या लगातार बढ़ी है। खास बात यह है कि यह होड़ सभी प्रमुख दलों में है। कोप्पल की सीट के अलावा यहां असली दंगल गंगावती सीट पर ही होगा। यहीं से रेड्डी चुनाव लड़ रहे हैं और इसी विधानसभा में जन्मस्थल भी आता है। कुल मिलाकर कोप्पल, येलबुर्गा, कुष्टगी, गंगावती और कनकगिरी नाम की पांच विधानसभाएं इस जिले में हैं। इस जिले में भाजपा के मूल वोटर माने जाने वाले लिंगायतों और कांग्रेस के कुरबा वर्ग की वोटों की संख्या अच्छी खासी है। रेड्डी की एंट्री का नुकसान किस पार्टी को होगा, यह भी देखने वाली बात होगी।
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सौ करोड़ से ज्यादा की बनाईं योजनाएं
भगवान हनुमान के जन्मस्थान को लेकर तमिलनाडु के दावे के बाद इस केंद्र को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने सौ करोड़ से ज्यादा की योजना बनाई है। इतना ही नहीं, इसमें से कुछ धन जारी करके काम भी शुरू कर दिया है। कोप्पल बस स्टैंड के सामने चाय की दुकान पर बैठे गुरुनिवास सरकार की इस घोषणा का स्वागत करते हैं। इसके सियासी लाभ के बारे में पूछने पर मुस्कुराते हुए इतना ही कहते हैं कि कुछ दिनों से सरकार इस पर ज्यादा ही ध्यान दे रही है। स्थानीय पत्रकार डूडेश डेढ़सूगर का कहना है कि कोप्पल जिले की राजनीति में गंगावती क्षेत्र विधानसभा में आने वाले भगवान हनुमान जन्मस्थल का रोल बढ़ता जा रहा है। वह बताते हैं कि दूसरे वर्ग के प्रत्याशी भी वहां जाते रहते हैं।

गंगावती में होगी असली जंग
एक दौर में कर्नाटक की राजनीति में बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं का काफी दबदबा रहा था। सिपाही के बेटे से लेकर खनन किंग कहे जाने वाले जनार्दन रेड्डी और उनके भाई सोमशेखर की तूती बोलती थी। सबसे बड़े भाई करूणाकर हैं। यह भी कहा जाता है कि इस राज्य में भाजपा के पैर मजबूत करने में इन भाइयों ने भी जोर लगाया। भाजपा के कई बड़े नेताओं से इनके संबंध थे।

  • जब सोनिया गांधी 1999 में बेल्लारी से लोकसभा का चुनाव लड़ीं थीं, तो उनके सामने दिग्गज भाजपा नेता रहीं सुषमा स्वराज ने दम भरा था। सोनिया जीत गई थीं, लेकिन इन भाइयों की ताकत सुषमा के पक्ष में सामने आई थी। वक्त बदलने के साथ जनार्दन को अवैध खनन में दो साल तक जेल में भी रहना पड़ा। अब वापस सियासत में आए हैं। इस बार भाजपा के लिए थोड़ी परेशानी खड़ी करेंगे। वैसे तो उनके भाई सोमशेखर भाजपा में हैं और पार्टी उन्हें चुनाव भी लड़वा रही है, लेकिन गंगावती में रेड्डी अपनी पार्टी कल्याण राज्य प्रगति पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस ने यहां से मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। इससे खफा हुए पुराने कांग्रेसी नेता एचआर श्रीनाथ पर भी रेड्डी ने डोरे डाले हैं। गंगावती के चुनाव में जीत किसी की भी हो, लेकिन सबकी जुबान पर यह है कि पास ही के जिले बेल्लारी के रेड्डी यहां चुनाव लड़ रहे हैं।


यहां भी मुद्दे लगभग वही, मोदी के नाम के सहारे भाजपा
कर्नाटक के अधिकांश जिलों में भ्रमण के बाद सामने आया कि प्रदेश की भाजपा सरकार को भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। कनकगिरी के विधायक बसवराज धादेसुगुर का नाम पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती घोटाले में सामने आया था। उनका एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे दो लोगों के बीच पैसे के लेन-देन का हिस्सा होने की बात कह रहे हैं। हालांकि उन्होंने इन आरोपों को नकारा, लेकिन कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर इस जिले में भी भाजपा को घेरने की कोशिश की थी। यहां तक कि उनकी गिरफ्तारी की मांग भी उठाई गई थी। ठेकेदारी का काम करने वाले अक्षय यह मानते हैं कि सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं। हालांकि वह कहते हैं कि कांग्रेस के नेता भी यह नहीं कह सकते हैं कि उनकी सरकार में भ्रष्टचार नहीं था। इस जिले के पास में ही बेल्लारी जिला भी है। यह जिला एक दौर में अवैध खनन के लिए चर्चा में रहा था और कांग्रेस के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने इसके खिलाफ यात्रा भी की थी।

  • बंगलुरू में आईटी कंपनी में काम करने वाले विशाख अभी वर्क फ्रॉम होम पर कोप्पल आए हैं। वह कहते हैं कि स्थानीय स्तर पर सरकार अच्छी नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर उन्हें पूरा भरोसा है।
  • विप्लव का कहना है कि भ्रष्टाचार से बचने के लिए वह बदलाव चाहते हैं। यहां के चुनाव में भी धनबल के प्रयोग से कोई इनकार नहीं करता है। खुलकर बोलने के बजाए साफ कहते हैं कि वोटरों की पर्चियों के साथ पैसे तक बांटे जाते रहे हैं और इस कारण नतीजे किसी भी तरफ चले जाते हैं।
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