कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद को मतदान के बाद 13 मई को होने वाली मतगणना में पूर्ण बहुमत का भरोसा है। वह कहते हैं कि इस बार जनता स्पष्ट जनादेश देगी। यही दावा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी कर रहे हैं। मतदान के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के प्रमुख नेताओं की धड़कन बढ़ गई है। कर्नाटक में प्रचार के बाद लौटे संजीव सिंह कहते हैं कि 125 से अधिक सीटें कांग्रेस की हैं। संजीव सिंह का कहना है कि सेंट्रल कर्नाटक से खुश होने वाली सूचना मिलेगी। हां, तटीय कर्नाटक भाजपा के लिए अच्छा रह सकता है। जेडी (एस) के एचडी कुमार स्वामी ने भी सफलता के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
डीके शिवकुमार ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कहा कि हम (कांग्रेस) चुनाव के बाद पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएंगे। डीके शिवकुमार की आवाज में भी काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री की रैलियों और इतने बड़े रोड शो का कोई असर नहीं होने वाला है। कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला को पार्टी द्वारा जनता को किए गए 5 गारंटी वाले वादे से बड़ी उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार में नहीं छोड़ी कोई कसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के चुनाव में हाई वोल्टेज प्रचार किया है। उन्होंने कल रात भी मतदान से पहले जनता से अपील की है। इससे पहले शनिवार को उन्होंने कर्नाटक में 26 कि मी लंबा रोड शो किया था। भाजपा मुख्यालय के एक नेता अभी भी बेंगलुरु में जमे हैं। वह कहते हैं कि आखिरी तीन दिन के प्रचार अभियान ने जनता के बीच में बड़ा संदेश दिया है। वह कहते हैं कि आप तटीय कर्नाटक को छोड़ दीजिए। वहां हमेशा भाजपा का दबदबा रहा है। इसबार भाजपा जेडी(एस) और कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में बड़ा कमाल दिखाने जा रही है। वह कहते हैं कि जनता को पता है कि उसके राज्य का विकास कौन कर सकता है। वह कहते हैं कि आप सोशल मीडिया में पर लोगों की प्रतिक्रियाएं देखेंगे तो अंदाजा हो जाएगा। इसके पीछे वह भाजपा को सभी वर्गो का मिल रहा वोट और काम को महत्वपूर्ण मानते हैं।
कर्नाटक में भाजपा की चुनावी तैयारी पर नजर डालें तो वह काफी बड़ी है। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तीन-चार महीने पहले से कर्नाटक पर खास तौर पर फोकस करना शुरू किया था। पार्टी ने केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को कर्नाटक में चुनावी तैयारियों से जोड़ा था। बताते चलें कि धर्मेन्द्र प्रधान ने उ.प्र. विधानसभा चुनाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर सफलता दिलाई थी। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी कर्नाटक में काफी समय दिया और भाजपा ने पूरे प्रचार अभियान में कोई कसर नहीं छोड़ी।
क्या किंग मेंकर की भूमिका में रहेगी जेडी (एस)?
डीके शिवकुमार कहते हैं कि चुनाव के बाद किंग मेकर की जरूरत नहीं पड़ेगी। भाजपा का कहना है कि 2018 में भी पार्टी बहुमत के करीब थी। लेकिन इस बार स्पष्ट जनादेश मिलेगा। बीके रेड्डी कहते हैं कि 2018 के विधानसभा चुनाव से सीटें अगर नहीं बढ़ी तो घटने का भी सवाल नहीं है। वह कहते हैं कि दरसल इस बार जेडी(एस) सीमित रह गई है। इस बारे में पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से संपर्क करने की कोशिश हुई लेकिन सफल न हो सके। हालांकि बेंगलुरु में विधानसभा चुनाव पर पिछले कई महीने से काम कर रहे ए. कृष्णामूर्ति कहना है चुनाव के नतीजे चौकाएंगे। जेडी(एस) कोई सीटों का घाटा नहीं होने वाला है। कांग्रेस को फायदा होने की संभावना है। इसके सामानांतर भाजपा की बसावराज बोम्मई की सरकार को जनता में नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।